पिता ओमवीर सिंह ने बताया रुपल ने किसान इंटर कॉलेज मढ़ी से पढ़ाई की है। परिवार का खेलों में भेजने का मन नहीं था। वहीं रुपल ने खेलों में जाने की जिद पकड़ ली। पिता 2017 में रुपल को कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कोच विशाल सक्सेना के पास ले आए। यहीं से उसके जीवन में खेल का नया अध्याय शुरू हुआ।
रुपल ने राष्ट्रीय स्तर पर 9 पदक झटके हैं, जिनमें 5 स्वर्ण, 3 रजत व 1 कांस्य पदक शामिल है। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर स्पर्धा में रजत पदक भी उनके नाम है। रुपल की माता ममता गृहिणी हैं, जबकि पिता ओमवीर सिंह किसान हैं। भाई परमजीत यूपी पुलिस में हैं। दादी ईश्वर कौर व ताऊ तंत सिंह सहित परिवार की निगाहें रुपल की जीत पर टिकी हैं।
पिता के साथ कोच ने निभाई अहम भूमिका
पिता ओमवीर सिंह ने रुपल को गांव से प्रतिदिन 30 किमी. का सफर तय कर कैलाश प्रकाश स्टेडियम लाना और ले जाने की जिम्मेदारी निभाई। कोच विशाल सक्सेना व उनकी पत्नी अमिता सक्सेना ने रुपल को यहां तक पहुंचाने में दिन रात एक कर दिया। स्टेडियम में मिट्टी का ट्रैक होने के चलते सप्ताह में दो दिन दिल्ली जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास के लिए भी गए।