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बस्ती रोशन करने के बजाय बरबाद कर दी सात करोड़ की बिजली

Thu, 25 Apr 2019 03:57 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

-152 करोड़ से अपग्रेड मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल को ट्रांसमिशन लाइन निर्माण में देरी पड़ी भारी
-15 मेगावाट की को-जनरेशन यूनिट लगी थी इस मिल में
- पावर ग्रिड को बेची जानी थी मिल की आवश्यकता से बची बिजली
- ट्रांसमिशन लाइन बनने में देरी से चार माह में जाया हो गई सात करोड़ रुपये की बिजली
 
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बिजलीघर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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152 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड हुई उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल को ट्रांसमिशन लाइन निर्माण की देरी से सात करोड़ रुपये का बड़ा फटका लगा है। समय से लाइन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के चलते मिल की टर्बाइन से बनने वाली सात करोड़ रुपये की ‘को-जनरेशन’ (बिजली) बरबाद हो गई। जबकि इतनी बिजली से रोजाना एक पूरी बस्ती रोशन हो जाती, जो ट्रांसमिशन लाइन बनने की देरी से चार माह में जाया हो गई। वहीं, मिल प्रबंधन और यूपी ट्रांसमिशन कारपोरेशन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मिल को भुगतना पड़ा है।
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वर्ष 1933 में स्थापित हुई मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल क्षेत्र के गन्ना किसानों की लाइफ लाइन है। प्रदेश शासन ने पिछले साल मिल को 152 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड कराया था। इसमें मिल की पेराई क्षमता 25 हजार टीसीडी से बढ़ाकर 35 हजार टीसीडी किया गया था और 15 मेगावाट क्षमता का को-जनरेशन प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट से बनने वाली 15 मेगावाट बिजली में से 6 से 7 मेगावाट बिजली तो मिल के लिए प्रयोग की जानी थी और बाकी बिजली पावर ग्रिड को बिक्री की जानी थी। इसके लिए मिल का पावर ग्रिड के साथ 4.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से करार भी हो गया था। चालू पेराई सत्र 2018-19 के तहत मिल पिछले साल 9 नवंबर को चालू हो गई थी। लेकिन 132 केवी नंगलापातू ट्रांसमिशन की लाइन तैयार नहीं होने के चलते टर्बाइन से बनने वाली 15 मेगावाट बिजली में से 7 से 8 मेगावाट बिजली रोजाना बरबाद होती रही।  
और रोजाना बिजली हुई बरबाद
मिल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार ट्रांसमिशन लाइन तैयार होने के बाद गत 13 मार्च से 17 अप्रैल तक यानि 36 दिन में 4323699 यूनिट बिजली (यानी 120102 यूनिट प्रतिदिन) पावर ग्रिड को बेची जा चुकी है जिसकी कीमत निर्धारित दर 4.78 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 2 करोड़ 66 लाख 7 हजार 282 रुपये (यानी 574087 रुपये प्रतिदिन) बैठती है। यदि विद्युत लाइन तैयार हो जाती तो मिल को पेराई सत्र शुरू होने की तिथि 9 नवंबर 2018 से लेकर 12 मार्च 2019 तक करीब 120 दिन में करीब 7 करोड़ रुपये की बिजली बिक्री होने से भारी फायदा होता जो उसे लाइन निर्माण में देरी के चलते नहीं हो सका।
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12 करोड़ रुपये की लागत से बनी है ट्रांसमिशन लाइन
शुगर मिल के प्रयोग से बची बिजली (को-जनरेशन) बेचने के लिए मिल प्रबंधन ने विद्युत लाइन बनवाने के लिए 12 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ये लाइन शुगर मिल से 132 केवी नंगलापातू ट्रांसमिशन तक बनाई गई है। मिल का बिजली बिक्री करार पावर ग्रिड के साथ 4.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से हुआ है।

बोलते आंकड़े
मिल स्थापित                         1933
निगम द्वारा टेकओवर                 1971
मिल का कुल क्षेत्रफल         27.11 हेक्टेयर
फैक्टरी क्षेत्र                          8.95 हेक्टेयर
मिल कालोनी                       4.03 हेक्टेयर
फार्म की जमीन                    14.13 हेक्टेयर
मिल क्षेत्र के गांव                     60
कुल गन्ना किसान                   18000
गत वर्ष गन्ना पेराई                  45 लाख कुंतल
इस साल पेराई अनुमान            52 लाख कुंतल

लाइन समय से बन जाती तो...
लाइन बनाने के लिए प्रबंधन ने 12 करोड़ रुपये पावर कारपोरेशन को पहले ही दे दिए थे। लेकिन लाइन के पोल खड़े करने और रेलवे लाइन के ऊपर से लाइन लाने की एनओसी आदि देरी से मिलने के चलते लाइन समय से नहीं बन सकी। 13 मार्च से 17 अप्रैल तक मिल दो करोड़ से ज्यादा की बिजली बिक्री कर चुकी है। लाइन समय से बन जाती तो प्रयोग से बची बिजली का नुकसान नहीं होता। -एसआर नारायण, महाप्रबंधक, मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल

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