हस्तिनापुर। अखिल विद्या समिति के तत्वावधान में सोमवार को हस्तिनापुर के प्राचीन कर्ण मंदिर के प्रांगण में मंदिरों के अध्यक्ष, महंत एवं समाजसेवी लोगों की बैठक आयोजित की गई थीं। इसमें ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन धरोहरों के संरक्षण एवं पर्यटन विकास के लिए विशेष समिति का गठन किया गया था। बुधवार को चेयरमैन अरुण कुमार सहित कई संस्थापक और महंतों ने समिति में शामिल नहीं होने की बात कही। साथ ही कहा कि ऐतिहासिक नगरी का विकास सीधे सरकार द्वारा होना चाहिए उनका ऐसा किसी भी समिति से कोई लेना देना नहीं है।
अखिल विद्या समिति परीक्षितगढ़ के विष्णु अवतार रुहेला ने विशेष कमेटी का गठन किया था। इसमें चेयरमैन अरुण कुमार, कर्ण मंदिर के महंत शंकर देव, पांडेश्वर मंदिर के अमन गिरी, भीष्म रमन स्वामी, प्रधान जितेंद्र सिंह को संरक्षक बनाया गया था। इसी उपलक्ष्य में बुधवार को फिर कर्ण मंदिर में बैठक की गई। इसमें कर्ण मंदिर के महंत शंकर देव जी महाराज, द्रोपदेश्वर महादेव के अनिल सारस्वत, द्रौपदी घाट की महंत वेगवती सहित चेयरमैन अरुण कुमार ने इस तरह की कमेटी बनाने पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि उनका अखिल विद्या समिति से कोई लेना देना नहीं है। शंकर देव जी महाराज ने कहा कि समिति परीक्षितगढ़ से रजिस्टर्ड है, इसलिए हस्तिनापुर में सोमवार को गठित की गई कमेटी से वह सहमत नहीं है। ऐतिहासिक नगरी के विकास के लिए वह सीधा विकास सरकार से कराना चाहते हैं। केंद्र सरकार से ऐतिहासिक नगरी के लिए मिले 500 करोड़ रुपए के बजट से ऐतिहासिक नगरी का कायाकल्प होगा।