मेरठ प्रांत ने अब से पहले 28 मार्च 1998 को गंगानगर में तीन दिवसीय समरसता शिविर आयोजित किया था। यह शिविर तीन दिन और दो रात चला था। इस शिविर में 51 हजार स्वयंसेवक आए थे। रात-दिन आयोजित होने वाले शिविर में यह रिकॉर्ड संख्या थी। तब मेरठ प्रांत में उत्तराखंड भी शामिल था। इस शिविर की खास बात ये थी कि गंगानगर भी तब विकसित नहीं हुआ था और खाली मैदान था, जिसमें टैंट लगाकर स्वयंसेवकों ने प्रवास किया था। तब गंगानगर के बड़े भूभाग में तंबुओं का नगर बस गया था। दिन और रात के तीन दिन के शिविर में इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की संख्या और उसकी व्यवस्था आज भी संघ के इतिहास में दर्ज है।
पुणे में हीं इकट्ठा हुए थे सवा लाख स्वयंसेवक
एक गणवेश में सबसे ज्यादा स्वयंसेवकों के समागम की अगर बात करें तो यह आयोजन 3 जनवरी 2016 को पुणे में आयोजित हुआ था। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में सवा लाख स्वयंसेवक एकत्र हुए थे। लेकिन मेरठ प्रांत की क्रांति धरा पर इससे दोगुनी से ज्यादा संख्या में स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण एक नया इतिहास रचने जा रहा है।
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