18 कंप्यूटरों की एफएसएल जांच खोलेगी पोल
इंस्पेक्टर परतापुर एपी मिश्रा का कहना है कि भाजपा नेता संजीव व सचिन के मेरठ और गजरौला की प्रिंटिंग प्रेस और गोदाम से छापे के दौरान 18 कंप्यूटर बरामद किए गए थे, जिनमें इस फर्जीवाड़े का सारा डाटा फीड है। 12 कंप्यूटर अलग हैं, जोकि प्रिंटिंग का ही काम करते हैं। इन कंप्यूटरों को फोरेंसिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा जा रहा है।
जांच रिपोर्ट से ही सच सामने आएगा कि नकली किताबों में एनसीईआरटी का असली वाटरमार्क कैसे प्रयोग किया जा रहा था। कहीं एनसीईआरटी की सीडी तो आरोपियों ने चोरी नहीं करा ली थी। पुलिस और एसटीएफ ने इसकी जानकारी जुटाई है। एसटीएफ दूसरे बिंदुओं पर भी काम कर रही है।
दस्तावेज नकली, बाकी सब असली
पुलिस का दावा है कि एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने में प्रकाशन फर्म के दस्तावेज फर्जी हैं। लेकिन किताबों की स्याही, वाटरमार्क और अन्य कई चीजें असली हैं। इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं शिक्षा जगत में चल रही है। प्रकाशकों में भी इस नकली किताबों के भंडाफोड़ को लेकर चर्चाएं बनी हुई है।
हत्थे नहीं चढ़े मुख्य आरोपी
कामगारों को जेल भेजने वाली परतापुर थाना पुलिस को मुख्य आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसका भतीजा सचिन गुप्ता अभी तक नहीं मिले। एसटीएफ भी दोनों की तलाश में लगी हुई है। लेकिन कोई सुराग नहीं लग पा रहा है।
पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी शहर से बाहर हैं और उनकी तलाश जारी है। जबकि बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी भाजपा के एक कद्दावर नेता के संरक्षण में मेरठ में ही छिपे हुए हैं। पुलिस आरोपियों पर हाथ डालने से बच रही है।
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