फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नकली किताब प्रकरण: एनसीईआरटी की भूमिका भी संदिग्ध, कंप्यूटरों को फॉरेंसिक लैब भेजने की तैयारी, खुलेंगे राज

Fri, 28 Aug 2020 02:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
कई तरह की किताबें बरामद की गईं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नकली किताबों की बरामदगी के चर्चित मामले में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नकली किताबों पर एनसीईआरटी का वाटरमार्क मिलने को लेकर सवाल उठाया है। किताबों में प्रयुक्त कागज और स्याही की भी जांच हो रही है।
विज्ञापन


भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की टीएनएचके पब्लिकेशन फर्म और उसके गोदाम जांच के घेरे में हैं। एसटीएफ का दावा कि संजीव और सचिन की प्रिंटिंग प्रेस से असली वाटरमार्क मिला है, जो कि एनसीईआरटी के पास ही होता है।

एनसीईआरटी टीम ने भी वाटरमार्क को लेकर चिंता जताई थी। जिसको लेकर एसटीएफ व परतापुर पुलिस ने एनसीईआरटी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताया तो यह भी जा रहा है कि नकली किताबों में प्रयुक्त होने वाली स्याही भी असली है। हालांकि कागज को लेकर अभी संदेह बना हुआ है। इस मामले में अभी कोई दूसरा विभाग भी बोलने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन

18 कंप्यूटरों की एफएसएल जांच खोलेगी पोल
इंस्पेक्टर परतापुर एपी मिश्रा का कहना है कि भाजपा नेता संजीव व सचिन के मेरठ और गजरौला की प्रिंटिंग प्रेस और गोदाम से छापे के दौरान 18 कंप्यूटर बरामद किए गए थे, जिनमें इस फर्जीवाड़े का सारा डाटा फीड है। 12 कंप्यूटर अलग हैं, जोकि प्रिंटिंग का ही काम करते हैं। इन कंप्यूटरों को फोरेंसिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा जा रहा है।

जांच रिपोर्ट से ही सच सामने आएगा कि नकली किताबों में एनसीईआरटी का असली वाटरमार्क कैसे प्रयोग किया जा रहा था। कहीं एनसीईआरटी की सीडी तो आरोपियों ने चोरी नहीं करा ली थी। पुलिस और एसटीएफ ने इसकी जानकारी जुटाई है। एसटीएफ दूसरे बिंदुओं पर भी काम कर रही है।

दस्तावेज नकली, बाकी सब असली
पुलिस का दावा है कि एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने में प्रकाशन फर्म के दस्तावेज फर्जी हैं। लेकिन किताबों की स्याही, वाटरमार्क और अन्य कई चीजें असली हैं। इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं शिक्षा जगत में चल रही है। प्रकाशकों में भी इस नकली किताबों के भंडाफोड़ को लेकर चर्चाएं बनी हुई है।
विज्ञापन

हत्थे नहीं चढ़े मुख्य आरोपी
कामगारों को जेल भेजने वाली परतापुर थाना पुलिस को मुख्य आरोपी भाजपा नेता संजीव गुप्ता और उसका भतीजा सचिन गुप्ता अभी तक नहीं मिले। एसटीएफ भी दोनों की तलाश में लगी हुई है। लेकिन कोई सुराग नहीं लग पा रहा है।

पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी शहर से बाहर हैं और उनकी तलाश जारी है। जबकि बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी भाजपा के एक कद्दावर नेता के संरक्षण में मेरठ में ही छिपे हुए हैं। पुलिस आरोपियों पर हाथ डालने से बच रही है।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें