नगीना। यात्रियों को सुलभ व सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराने का उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड परिवहन निगम का दावा जमीनी हकीकत पर खोखला साबित हो रहा है। बसों के चालक व परिचालक रात के अंधेरे में यात्रियों को बाईपास पर उतारकर चले जाते हैं।
नगीना में रोडवेज बस स्टैंड रेलवे स्टेशन के सामने स्थित है। धामपुर व नजीबाबाद की दिशा से रोजाना नगीना आने वाली करीब 150 रोडवेज बसों को आगे जाने के लिए कोतवाली मार्ग पर पड़ने वाले रेलवे फाटक से होकर निकलना पड़ता है।
रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम व गंतव्य पर जल्दी पहुंचने के चक्कर में अधिकतर चालक बस को हाईवे पर बाईपास से निकालकर आगे बढ़ जा रहे हैं। इसके चलते रोडवेज बस स्टैंड पर खड़े यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बस चालक रात में भी यात्रियों को हाईवे पर उतारकर चले जाते हैं।
नगीना निवासी शिक्षक अनवर महमूद का कहना है कि उन्हें अक्सर बसों में सफर करना पड़ता है। लेकिन, रोडवेज बस के चालक उन्हें फोरलेन बाईपास पर सेंट मेरी स्कूल के पास उतार देते हैं। उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
नगर के आजाद कॉलोनी निवासी शुभम राजपूत का कहना है कि अधिकतर रोडवेज बस के चालक नगीना में बस स्टैंड पर आना पसंद नहीं करते। यात्रियों को मजबूरी में बाईपास पर उतरना पड़ता है।
सामाजिक कार्यकर्ता तंजील आलम का कहना है कि नजीबाबाद व मुरादाबाद की दिशा से आने वाली रोडवेज बसों के चालक नगीना बस स्टैंड तक बस लाने को मना कर देते हैं।
शिक्षक मोहम्मद अम्मार का कहना है कि परिवहन निगम के अधिकारियों को ऐसे सभी बस चालकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो नगीना बस स्टैंड तक बसें नहीं लाते।
स्थानीय विधायक मनोज पारस का कहना है कि वह परिवहन मंत्री से मिलकर इस संबंध में शिकायत करेंगे।
एआरएम बिजनौर अशोक कुमार का कहना है कि सभी रोडवेज बसें बस स्टैंड होकर जानी चाहिएं। यदि चालक बाहर से बसों को निकाल रहे हैं तो टीआई की ड्यूटी लगाकर उन्हें चिह्नित किया जाएगा।