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ऋषिकुमार ने राजा परीक्षित को दिया था श्राप : रिया किशोरी

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नगली गजरोली श्रीमद् भागवत कथा सुनाती रिया किशोरी स्रोत संवाद
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दूसरे दिन राजा परीक्षित का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रोत्रा
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हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव नगली गजरोली के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन कथावाचक ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।
शुक्रतीर्थ धाम से आई कथावाचक रिया किशोरी ने श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कथा व्यास रिया किशोरी ने शुकदेव, परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए वन में गए। वन्य पशुओं के पीछे दौड़ने के कारण वह प्यास से व्याकुल हो गए और जलाशय की खोज में इधर-उधर घूमते हुए वह शमीक ऋषि के आश्रम में पहुंच गए। वहां शमीक ऋषि नेत्र बंद कर शांत भाव से आसन पर बैठे हुए ब्रह्मध्यान में लीन थे। राजा परीक्षित ने उनसे जल मांगा, किंतु ध्यानमग्न होने के कारण शमीक ऋषि ने कुछ भी उत्तर नहीं दिया।
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कलियुग के प्रभाव से राजा परीक्षित को प्रतीत हुआ कि यह ऋषि ध्यानस्थ होने का ढोंग कर उनका अपमान कर रहा है। उन्हें ऋषि पर क्रोध आया। उन्होंने अपने अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से पास ही पड़े हुए एक मृत सर्प को अपने धनुष की नोक से उठा कर ऋषि के गले में डाल दिया और अपने नगर लौट आए। शमीक ऋषि ध्यान में लीन थे। उन्हें ज्ञात ही नहीं हो पाया कि उनके साथ राजा ने क्या किया है, किंतु उनके पुत्र शृंगी ऋषि को जब इस बात का पता चला तो उन्हें राजा परीक्षित पर बहुत क्रोध आया।
शृंगी ऋषि ने सोचा कि यदि यह राजा जीवित रहेगा तो इसी प्रकार ब्राह्मणों का अपमान करता रहेगा। इस प्रकार विचार करके उस ऋषिकुमार ने कमंडल से अपनी अंजुल में जल लेकर उसे मंत्रों से अभिमंत्रित कर राजा परीक्षित को श्राप दिया कि जा तुझे आज से सातवें दिन तक्षक सर्प डसेगा। शमीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है।
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उन्होंने कहा कि कलयुग का प्रभाव हम सब पर है। इसलिए इनसे बचने के लिए भगवान की पूजा जरूरी है। कथा में सभी श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। ग्रामीणों का पूर्ण सहयोग रहा।
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