- अंग्रेजों को लगान देने का कार्य भी बंद कर दिया गया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बिजरौल गांव के शाहमल ने 18 जुलाई को बड़ौत क्षेत्र को अपने अधिकार में लेकर स्वतंत्र घोषित कर दिया। इस दौरान दिल्ली की क्रांतिकारी सेना को आपूर्ति भेजने का कार्य शुरू किया गया। बड़ौत क्षेत्र ने अंग्रेजों को लगान देना भी बंद कर दिया।
इतिहासकार एके गांधी ने बताया 16 जुलाई के दिन जिस समय खाकी रिसाला ने बसोद गांव का विनाश किया, उस समय तक शाहमल वहां से जा चुके थे। इस कारण उनका अंग्रेजों के साथ टकराव नहीं हुआ। डनलप की भारी अस्त्र शस्त्रों से लैस खाकी रिसाला को शाहमल के पीछे लगाया गया। रास्ते में पड़ने वाले गांवों से भेड़ें और दूसरी आपूर्ति जबरदस्ती छीनी गई। इस दौरान खाकी रिसाल को गांवों से भी विरोध का सामना भी करना पड़ रहा था। इसलिए उसने कुछ चौधरियों का अपहरण कर लिया। ऐसे में भय ग्रस्त ग्रामीणों ने गांव खाली करने शुरू कर दिया।
एके गांधी के अनुसार आगे बढ़ता हुआ डनलप बड़का गांव पहुंचा। इस दौरान ग्रामीणों ने मार्ग अवरुद्ध कर रखा था। दूर शोर हो रहा था, लग रहा था कि सेना एकत्रित हो रही हो। कुछ ही देर में शाहमल की सेना ने खाकी रिसाला पर हमला बोल दिया। इससे घबराकर खाकी रिसाला को पीछे हटना पड़ा और जिन लोगों का उसने अपहरण किया था उनको भी छोड़ना पड़ा। तभी घोड़े पर सवार शाहमल के भांजे ने डनलप पर वार किया। डनलप इतना घबरा गया था कि उसका हेलमेट और पिस्तौल नीचे जा गिरे।
इस दौरान उसने खुद को किसी तरह बचा लिया। पीछे हटने के बाद डनलप की सेना बड़ौत पहुंच गई। शाहमल भी वहां अपनी सेना के साथ थे। शाहमल घोड़े पर सवार थे। क्रांतिकारी सेना बहादुरी से लड़ रही थी। आधुनिक हथियारों के सामने पिछड़ रही थी। इस बीच शाहमल की पगड़ी खुलकर घोड़े के पैरों में जा लिपटी। इसी का लाभ लेकर एक शत्रु सैनिक ने उनका सिर काट दिया और भाले पर लटका कर प्रदर्शन करने लगा। अपने नेता की मृत्यु के साथ ही शाहमल की सेना बिखर गई। लेकिन दोपहर बाद उसने एक बार फिर एकत्र होकर हमला किया। लेकिन शाहमल की सेना हार गई और उनमें से अनेक वीरों ने अपना बलिदान दिया।