इंश्योरेंस कंपनी की जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ रोड स्थित दो अस्पताल फर्जी सर्टिफिकेट बनाने में माहिर हैं। इन दोनों अस्पतालों में मरीजों का इलाज नहीं होता, बल्कि ऐसे फर्जी काम होते हैं। इलाज करने का तरीका दोनों अस्पतालों का एक जैसा है। दवाई भी एक जैसी लिखते हैं, सबका एक्सीडेंट में घायल होना बताकर इलाज किया जाता है। जांच में इसकी पोल खुली। हॉस्पिटल वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों की मानें तो मेरठ में करोड़ों रुपये का क्लेम ऐसे ही फर्जी तरीके से यह गिरोह ले चुका हैं...
करोड़ों का ले चुके क्लेम
फिलहाल अभी मेरठ में 25 मामले फर्जी निकले हैं। कई मामलों की जांच चल रही है। पुलिस भी इसकी जांच करेगी तो इस गिरोह तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस गिरोह की काफी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी जुटा चुकी है। यह गिरोह घायलों का बाद में इंश्योरेंस कराकर भी फर्जी तरीके से क्लेम ले चुके हैं।
इनकी सौंपी रिपोर्ट
मरने के बाद इंश्योरेंस कराने वाले सात लोगों की पूरी रिपोर्ट मंगलवार को पुलिस को सौंपी गई। परीक्षितगढ़ क्षेत्र से संतवीर सिंह की कैंसर से मौत हुई। पांच दिन बाद इंश्योरेंस कराकर 23 जून 2017 को एक अस्पताल में भर्ती बताकर मृत बताया। भावनपुर क्षेत्र के तेजपाल की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। दो दिन बाद इंश्योरेंश कर चार दिसंबर 2017 को अस्पताल में भर्ती होना बताया। मेडिकल क्षेत्र के मोनू, दीपक, नौचंदी से हरेंद्र, किठौर से इस्लाम, नन्हें की मौत के बाद अस्पताल में भर्ती दर्शाया गया। जिसके बाद उन्होंने क्लेम लिया है।
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