डीएम द्वारा बनी कमेटी की जांच में विद्युत सुरक्षा का खुलासा, जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट
लिफ्ट में प्रसव के 2 घंटे बाद करिश्मा की मौत का मामला, हॉस्पिटल प्रबंधक देंगे जवाब
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित कैपिटल अस्पताल की लिफ्ट में करिश्मा की मौत का जिम्मेदार कौन है, इसका खुलासा जल्दी डीएम द्वारा गठित जांच कमेटी करेगी। अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि करिश्मा की जान अवैध रूप से संचालित की जा रही लिफ्ट ने ली थी। विद्युत सुरक्षा अधिकारी अनुराग सिंह ने कहा कि अस्पताल में एनओसी के अवैध रूप से लिफ्ट लगी थी। यहां मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था। शिकायत भी की, बावजूद सुनवाई नहीं हुई। करिश्मा की मौत के बाद जांच कमेटी प्रत्येक पहलू पर बारीकी से पड़ताल कर रही है।
करिश्मा ने बृहस्पतिवार को बच्ची का जन्म दिया था। ऑपरेशन थियेटर से वार्ड बॉय और नर्स स्ट्रेचर पर लेटाकर करिश्मा को लिफ्ट से ला रहे थे। लिफ्ट गिरने के चलते महिला की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में डीएम दीपक मीणा ने सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ कोतवाली, विद्युत सुरक्षा और डिप्टी सीएमओ की कमेटी बनाकर एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है। प्राथमिक जांच में सामने आया कि कैपिटल हॉस्पिटल में बिना एनओसी के लिफ्ट संचालित हो रही थी। इस लिफ्ट में सिर्फ मरीजों को अस्पताल का स्टाफ लेकर आता-जाता था।
रोजाना तीमारदार लिफ्ट ठीक से न चलने की शिकायत करते थे। दस दिन पहले अस्पताल संचालक ने लिफ्ट को ठीक भी कराया था, इसके बाद भी वह ठीक से नहीं चल रही थी। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ने बताया कि कैपिटल अस्पताल में सील लगी है। कमेटी ने अपने-अपने विभाग से संबंधित दस्तावेज देखे हैं। अस्पताल का भी मुआयना किया जाएगा। सभी बिंदु पर जांच होगी, इसके बाद डीएम को रिपोर्ट सौंपेंगे।
उधर, करिश्मा की मौत के बाद अंकुश मावी और उसकी चार साल की बच्ची का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके बहरोड़ा गांव में लोगों की आवाजाही लगी है।
यह था मामला
किठौर के बहरोडा निवासी सेना के जवान अंकुश मावी की पत्नी करिश्मा हूण ने बृहस्पतिवार दोपहर कैपिटल अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था। दो घंटे बाद करिश्मा हॉस्पिटल की लिफ्ट के दरवाजे में फंस गई और उसकी मौत हो गई थी। जिस पर गुस्सा तीमारदार और अन्य लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी थी। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ के साथ मारपीट हुई थी। मौके पर पहुंची पुलिस से भी तीमारदारों की तीखी नोकझोंक हो गई थी। इस घटना को लेकर तीसरे दिन भी करिश्मा के परिजनों में अस्पताल की व्यवस्था के प्रति नाराजगी है।
न गिरफ्तारी हुई और न बयान लिए
मेरठ। पति अंकुश मावी की तहरीर पर लोहियानगर थाने में कैपिटल अस्पताल मालिक राजीव अग्रवाल, प्रबंधक कपिल त्यागी और डॉ. कविता भाटिया समेत अज्ञात स्टाफ के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया था। तीन दिन बीतने के बावजूद भी थान पुलिस ने नामजद लोगों की पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की और न ही बयान लिए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विशेषज्ञ को भेजने की बात कही जा रही है। डाक्टरों से पुलिस संपर्क कर रही है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि अभी तक इस मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के कब्जे में है डीवीआर
परिजनों के हंगामे व तोड़फोड़ में सीसीटीवी भी टूट गए थे। लेकिन पुलिस ने डीवीआर कब्जे में ली है। हंगामे और तोड़फोड़ की फुटेज पुलिस को मिली है। जिसको देखकर पुलिस आगे की कार्रवाई करने की बात कह रही है। लिफ्ट में जो लोग थे, उनके भी बयान दर्ज किए जाएंगे। लिफ्ट किस कंपनी की लगी है, इसकी जांच कराई जा रही है। दस दिन पहले लिफ्ट की मरम्मत करने वाले कर्मचारियों से पुलिस पूछताछ करेगी।
लिफ्ट लगाने के लिए करना होता ऑनलाइन आवेदन
विद्युत सुरक्षा अधिकारी अनुराग सिंह ने बताया कि घरेलू या व्यवसायिक भवनों में लिफ्ट लगवाने के लिए विद्युत सुरक्षा के पोर्टल ऑनलाइन आवेदन करना होता है। जिसमें विकास प्राधिकरण के मानचित्र, फायरब्रिगेड सहित कई एनओसी लेने का हवाला देना अनिवार्य है। जिस कंपनी की लिफ्ट और मरम्मत करने वाली कंपनी रजिस्टर्ड है। इसका भी जिक्र ऑनलाइन आवेदन में करना पड़ता है, तभी लिफ्ट लगाने की एनओसी देते हैं। कैपिटल अस्पताल ने एनओसी नहीं ले रखी है।
यह आती है लिफ्ट में दिक्कत
सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी ज्यादातर लिफ्टों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी आ सकती है, इससे लिफ्ट का संचालन बाधित हो सकता है। अत्यधिक नमी, तापमान में अत्यधिक परिवर्तन, और धूल जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियां लिफ्ट की मैकेनिकल पार्ट्स और इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। लिफ्ट में लगे आपातकालीन ब्रेक सिस्टम में खराबी आने पर लिफ्ट अचानक रुक सकती है या गिर सकती है।
लिफ्ट बंद होते ही घुटने लगता है दम
लिफ्ट में कोई हादसा न हो। इसके लिए बेहद जरूरी है कि लिफ्ट का इस्तेमाल करते वक्त सावधानी बरतें। लिफ्ट विशेषज्ञ अंकित सक्सेना और नितिन पुनिया ने बताया कि कई बार लिफ्ट अचानक ही रुक जाती है, उसमें कोई टेक्निकल खराबी आ जाती है। लाइट जाने से भी लिफ्ट बंद हो जाती है। ऐसे में कमजोर दिल वाले काफी घबरा जाते हैं। कुछ लोगों को बंद लिफ्ट में घुटन भी महसूस होने लगती है। अब लगभग हर ऊंची बिल्डिंग में लिफ्ट की सुविधा मौजूद रहती है। खासकर, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए। ऐसे में लोग लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लिफ्ट की मेंटेनेंस का ख्याल रखना भी जरूरी है। वर्षों पुरानी बिल्डिंग के लिफ्ट में अक्सर ऐसे हादसे होते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
■ समय-समय पर लिफ्ट का मेंटेनेंस करवाना बहुत जरूरी है, लिफ्ट का इस्तेमाल जल्दबाजी में न करें।
■ लिफ्ट का बटन दवाएं और फिर दरवाजा खुलने के बाद सही से देखें, उसके बाद ही अंदर जाएं। कई बार लोग फोन पर बात करने के चक्कर में भी इन चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं और हादसे हो जाते हैं
■ लिफ्ट में घुसने से पहले देख लें कि उसमें पहले से ही अधिक लोग तो नहीं। ओवरलोड करने से भी लिफ्ट में टेक्निकल समस्या आ सकती है, बीच में ही लिफ्ट रुक सकती है।
■ यदि आप लिफ्ट में अकेले हैं और लिफ्ट अचानक बीच में ही रुक जाए, तो पैनिक न करें। लिफ्ट में यदि अलार्म बटन लगा है तो उसे प्रेस करें। कुछ लिफ्ट में हेल्पलाइन नंबर भी लिखा होता है। लिफ्ट में ये नंबर लिखा है तो उस पर कॉल करें।
■ यदि आप लिफ्ट में फंस गए हैं, तो बार-बार उसे चलाने के लिए बटन प्रेस न करें। कई बार लिफ्ट जिस फ्लोर पर रुकनी चाहिए, वहां नहीं रुकती और नीचे जाने लगती है। इससे भी लोग डर जाते हैं। इस स्थिति में भी बार-बार बटन न दबाएं वरना लिफ्ट में कोई दूसरी कमी भी आ सकती है।