मेरठ। मेरठ कॉलेज आतंकवाद पर रिसर्च करेगा। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस एंड रिसर्च ने कॉलेज के डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट को बड़ा प्रोजेक्ट दिया है।
समुद्र के रास्ते बढ़ते आतंकवाद के खतरे, हथियार, मानव और ड्रग की तस्करी के मद्देनजर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। भारत सरकारी की निगरानी में रिसर्च वर्क होगा। पांच प्रोफेसर रिसर्च की मॉनिटरिंग करेंगे।
डॉ. संजय कुमार ने मैरीटाइन सिक्योरिटी चैलेंजस टैरेरिज्म एंड पायरेसी एट सी इन द ग्लोबल ईरा: अन एनालेटिकल स्टडी विषय पर मेजर प्रोजेक्ट के लिए आईसीएसएसआर को प्रस्ताव भेजा था। आईसीएसएसआर ने 25 लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।
दो साल की अवधि में समुद्र के रास्ते आतंकवाद, समुद्री डकैती और तस्करी के मुद्दे पर रिसर्च होगी। अधिकारी और एक्सपर्ट समेत 1751 लोगों से इनपुट लिया जाएगा। डॉ. संजय कुमार के मुताबिक प्रोजेक्ट का फोकस दो बिंदुओं पर है। पहला समुद्र के रास्ते कौन-कौन से खतरे पैदा हुए हैं, उनकी गहराई में जाना है।
दूसरा समुद्री सुरक्षा मजबूत कैसे की जा सकती है। किसी भी देश की सीमा से 200 मील बाद समुद्र की खुली सीमा होती है। उसमें किसी भी देश का कानून नहीं चलता। आतंकवादी, तस्कर और डकैत इसका फायदा उठा रहे हैं। मुंबई आतंकवादी हमले के गुनहगार समुद्र के रास्ते आए थे।
सोमालिया के डकैत समुद्री में डकैती करने के लिए कुख्यात हैं। वह रात में व्यापारी पोत को खुली समुद्र सीमा में अपना शिकार बनाते हैं। हिंद महासागर में चीन का दखल बढ़ रहा है। यह भी एक चिंता का विषय है। बॉर्डर पर फेनसिंग होने की वजह से समुद्री रास्ते का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। इसके आर्थिक और सामाजिक पहलू भी हैं। समुद्री सुरक्षा चुनौती है। आईसीएसएसआर ने किसी कॉलेज को पहली बार इतना बड़ा प्रोजेक्ट दिया है।
इस तरह लेंगे इनपुट
प्रोजेक्ट में 1751 लोगों से बातचीत की जाएगी। इसमें आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के 855, पॉलिसी मेकर, स्ट्रेटैजी प्लानर, अधिकारी, क्षेत्रीय नेता, मीडियाकर्मी, विषय विशेषज्ञ, रिसचर्स और बंदरगाहों के आसपास रहने वाले लोगों से इनपुट लिया जाएगा।