फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूलों की पहल : पुरानी किताबें लाएं और अगली ले जाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूलों की पहल... पुरानी कक्षा की किताबें जमा करें, अगली की ले जाएं
विज्ञापन

मेरठ। स्कूलों में नया सत्र कुछ जल्द शुरू होने जा रहा है। विद्यार्थी नई किताबों से पढ़ाई शुरू करेंगे। कुछ अभिभावक ऐसे भी हैं जो नई किताबों का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। कोरोना से भी इन परिवारों को चोट पहुंची है। ऐेसे में सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों में बुक बैंक बनाकर नई पहल की जा रही है, जिसमें पुरानी किताबें बच्चों के काम आ सकेंगी। साथ ही इससे पर्यावरण को फायदा होगा और पेपर की बचत होगी।
एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो रहा है। कक्षाएं शुरू होते ही सबसे पहले अभिभावकों पर बच्चों के लिए नया कोर्स खरीदने का दबाव हर साल रहता है। कोरोना काल में लगभग सभी अभिभावकों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है। ऐसे में स्कूलों की फीस सहित किताबों का खर्च वहन करना सभी के लिए आसान नहीं रहता है। इसके लिए मिशनरी और कॉन्वेंट स्कूलों ने पहल की है। जिसके जरिए बच्चों को पुरानी किताबों को ही दोबारा इस्तेमाल में लाया जा रहा है। इसके लिए पुरातन छात्र समूह भी आगे आकर मुहिम चला रहे हैं।
विज्ञापन

सोगम ने की शुरुआत
सोगम (सोफियंस ओल्ड गर्ल्स एसोसिएशन) द्वारा सोफिया गर्ल्स स्कूल में बुक शेयरिंग मुहिम शुरू की गई थी। इसके तहत तीन दिन स्कूल में स्टाल लगाकर जरूरतमंद छात्राओं को किताबें दी गईं। सोगम की अध्यक्ष डा. श्रुति सहगल ने बताया कि 19 मार्च को कक्षा एक से पांच और 23 मार्च को कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं के लिए यह अभियान चलाया गया। इसके बाद 31 मार्च को दोबारा लाभ लेने का भी मौका दिय गया। अभिभावकों ने पुरानी किताबें और अन्य सामग्री का सहयोग किया। कुछ छोटे बच्चों ने खिलौने भी अन्य बच्चों के लिए दिए। अभियान में प्रत्येक कक्षा में करीब 50 सेट किताबों के दिए गए।
दीवान स्कूल में भी साझा की जा रहीं किताबें
दीवान पब्लिक स्कूल में हर साल जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को पुरानी किताबें और यूनिफार्म दी जाती हैं। प्रधानाचार्य एके दूबे ने बताया कि स्कूल में हर तरह के विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। लॉकडाउन के बाद कुछ अभिभावकों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो गई है। ऐसे में विद्यार्थियों की सहायता करने के उद्देश्य से पुरानी किताबें और यूनिफार्म को दोबारा उपयोग में लाते हुए बच्चों को दिया जाता है। इसके लिए शिक्षकों की सहायता भी ली जाती है। इस साल भी कई विद्यार्थियों ने इसका लाभ लिया है।
स्कूल अपने स्तर से भी कर सकते हैं पहल
स्कूल इस तरह की पहल अपने स्तर से भी शुरू कर सकते हैं, जिससे विद्यार्थी एक-दूसरे के सहयोग से पढ़ाई कर सकते हैं। साथ ही लॉकडाउन के कारण आर्थिक स्तर से आहत अभिभावकों भी बच्चों की पढ़ाई का वहन आसानी से कर सकते हैं।
विज्ञापन

केंद्रीय विद्यालयों में भी चल रही योजना
केंद्रीय विद्यालयों में भी पुस्तक उपहार मुहिम चलाई जा रही है। सिख लाइंस के प्रधानाचार्य नवल सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से बच्चों को किताबें बांटी जाएंगी। वहीं पंजाब लाइंस में 26 मार्च को परीक्षा परिणाम जारी किया गया। उसी दिन बच्चों को किताबें बांट दी गईं। बचे हुए छात्रों को भी किताबें दी जाएंगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें