जातिविहीन और खुशहाल समाज का देखा था सपना
रालोद के प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने जातिविहीन समाज का सपना देखा था। वह नौकरियों में गांवों के लिए 50 फीसदी आरक्षण चाहते थे। अभावों से लड़ते हुए उन्होंने पढ़ाई की और आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। प्रदेश के सीएम और देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 को नूरपुर में हुआ था। अपने पिता चौधरी मीर सिंह को किसानी जीवन से उत्पन्न कष्टों के बीच जीते हुए देख बड़े हुए चौधरी चरण सिंह आगरा कालेज से बीएससी और मेरठ कालेज मेरठ से एलएलबी करने के पश्चात वकील के रूप में प्रैक्टिस करने लगे। 1929 में उन्होंने गाजियाबाद में स्थानीय स्तर पर टाउन कांग्रेस कमेटी की स्थापना करके राजनीति में प्रवेश किया।
गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन से ईमानदारी, निर्भिकता का जो अध्याय शुरू हुआ व ताउम्र चलता रहा। भारतीय राजनीति में आज जहां भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और हिंसा सामान्य व्यवहार हो गई है वहीं चौधरी चरण सिंह इनसे हमेशा दूरी बनाए रखी। आत भी किसानों के जीवन में चौधरी साहब के रास्ते पर चलकर ही बदलाव आ सकता है।
चौ. चरण सिंह की जयंती पर कवि सम्मेलन आज
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर बृहस्पतिवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सुबह 8:45 पर महापुरुषों की मूर्ति पर माल्यार्पण किया जाएगा। 9:00 बजे हवन होगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में दो बजे कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।