धर्म ही मनुष्य का स्वभाव : भव्य भूषण
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 23वें दिन बुधवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
गुरुवर 108 भव्य भूषण मुनिराज ने कहा कि अपने भीतर के कलुषित मन को साफ करो। धर्म ही मनुष्य का स्वभाव है। उस स्वभाव में विकारों की परत तो जम सकती है, परंतु उसकी विशेषता समाप्त नहीं हो सकती। इसलिए मनुष्य धर्म छूटता नहीं है। जिस प्रकार पानी को चाहे कितना भी उबालो, वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ता। उसी प्रकार कोई व्यक्ति कितना भी बुरा क्यों ना हो, परंतु प्रभु का स्मरण अवश्य करता है। कभी न कभी उसमें दया भाव उत्पन्न हो जाता है।
स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अमित जैन, सागरमल जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य विशाल जैन, चंदन भैया, नरेंद्र जैन, संयम जैन, सतीशचंद जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन आकांक्षा जैन, नीतिका जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। 501 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन राजरानी जैन, सुशील जैन ने किया। आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन आशू जैन, रंजीता जैन, सिद्धि जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन चंदन ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, राजीव जैन का विशेष सहयोग रहा।