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आपदा आने पर तीन मिनट में आपके पास पहुंचेगी राहत

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मेरठ। आपदा से बचाव के लिए प्रशासन की तरफ से ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। इसके लिए बाढ़ और भूकंप से बचाव के लिए बुकलेट तैयार की गई है। मेरठ भूकंप के हाई रिस्क जोन-4 में स्थित हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान यहां कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए, लेकिन उनकी तीव्रता अत्यधिक नहीं थी। इससे बचाव के लिए प्रशासन ने पिछले दिनों शहर के मॉल और अन्य स्थानों पर मॉक ड्रिल कर रिस्पांस टाइम चेक किया था। यह रिस्पांस टाइम अधिकतम तीन मिनट रहा था।
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मेरठ में भूकंप, आग, औद्योगिक क्षेत्र, महामारी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बनी रहती है। इस स्थिति से बचने के लिए प्रशासन प्लान तैयार कर रहा है। यहां आग के सबसे अधिक मामले शार्ट सर्किट से हुए हैं। अधिक गर्मी होने की वजह से आग के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। वहीं, तेजी से हो रहे शहरीकरण से यहां परतापुर में औद्योगिक क्षेत्र स्थित है। वहीं, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के तेल डिपो भी परतापुर और सिटी स्टेशन के पास स्थित हैं।
2003 से 2013 के बीच बनीं बहुमंजिला इमारतें
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मेरठ में वर्ष 2003 से 2013 के बीच बहुमंजिला इमारतों के बनाने में बूम आया। इस दौरान कई इंजीनियरिंग कॉलेज और नई टाउनशिप खोलीं गईं। ऐसे में प्रशासन के सामने आपदा के दौरान यहां सुरक्षा देना चुनौती है। इस दौरान अंसल एपीआइ सुशांत सिटी, मेरठ स्पोर्ट्स सिटी, सुपरटेक पामग्रीन, राधा गोविंद इंजीनियरिंग कॉलेज, विद्या नॉलेज पार्क आदि इमारतें तैयार हुईं।
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भारत के 8 बड़े भूकंप में मेरठ का नाम शामिल
1. 15 जनवरी 1934 बिहार 11 हजार मौत
2. 15 अगस्त 1950 असम 11 हजार 538 मौत
3. 20 अक्तूबर 1991 उत्तराखंड 768 मौत
4. 30 सितंबर 1993 लातूर, महाराष्ट्र 30 हजार मौत
5. 29 मार्च 1999 उत्तराखंड 100
6. 26 जनवरी 2001 कच्छ, गुजरात 30 हजार मौत
7. 8 अक्तूबर 2005 कश्मीर, पाकिस्तान 1336 मौत
8. 23 मार्च 2015 मेरठ, 3.5 रिएक्टर स्केल 0 मौत
मेरठ क्षेत्र में आपदा का इतिहास
1. 10 अप्रैल 2006 विक्टोरिया पार्क में आग की घटना
ये हैं खतरनाक औद्योगिक इकाइयां
1. निपरो ग्लास फैक्ट्री, गांव फिटकरी, मवाना रोड।
2. दौराला शुगर मिल - यहां दस से अधिक टन क्लोरीन गैस को रखा जाता है।
3. पसवाड़ा पेपर मिल, मोहिउद्दीनपुर - यहां 15 से अधिक टन एलपीजी रखी जाती है।
निरंतर समीक्षा की जाती है
हमारी तरफ से निरंतर बैठक होती रहती है। आपदा से बचाव के लिए समीक्षा की जाती है। जिससे किसी भी अप्रिय घटना होने पर अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सके - सुभाष चंद प्रजापति, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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