मेरठ नगर निगम में सपा के लिए मुस्लिम वोट बैंक को फिर से पाना बड़ी चुनौती होगा। जिस तरह से मुस्लिमों ने एआईएमआईएम को गले लगाया है, उसने सपाइयों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। पार्टी को हार की समीक्षा करने की जरूरत है।
सपा की हार के जो कारण छनकर आए हैं, उनमें सबसे बड़ा कारण मुस्लिम वोट बैंक का खिसकना है। इसकी खिसकने की वजहों में एआईएमआईएम प्रत्याशी का कुरैशी होना भी रहा, शहर में कुरैशी बड़ी संख्या में हैं। दो बड़े राजनीतिक परिवार पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी याकूब कुरैशी और पूर्व सांसद व पूर्व मेयर शाहिद अखलाक कुरैशी का पर्दे के पीछे से एआईएमआईएम प्रत्याशी की तरफ झुकाव का इशारा था। माफिया अतीक अहमद का ताल्लुक गद्दी बिरादरी से था। शहर में गद्दी बिरादरी के काफी वोट हैं।
प्रयागराज के अस्पताल में जिस तरह अतीक और उसके भाई की हत्या की गई, इससे वह लोग भी नाराज थे। शहर में अंसारी बिरादरी बड़ा वोट बैंक हैं। रफीक अंसारी दूसरी बार विधायक हैं। इस बार रफीक अंसारी भी अपनी पत्नी के लिए महापौर का टिकट मांग रहे थे, लेकिन उन्हें टिकट न देकर विधायक अतुल प्रधान की पत्नी को टिकट दिया। इससे अंसारी भी खफा थे।
उनका कहना था कि नगर निगम में मुस्लिम वोट साढ़े चार लाख के आसपास हैं, इस वोट बैंक वाले प्रत्याशी को न उतारकर सपा ने एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया, जिसकी बिरादरी के वोट उनके मुकाबले काफी कम हैं।
अतुल प्रधान के वार्ड से भाजपा का पार्षद निर्विरोध चुने जाने से भी मुस्लिमों को यह संदेश गया कि वह ज्यादा मजबूती से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। मुस्लिमों के कद्दावर नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, शहर विधायक रफीक अंसारी, रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद और युवा सपा नेता बदर अली प्रचार से दूर रहे। बदर अली ने पिछले निकाय चुनाव में युवा सेवा समिति बनाई थी और उसके पांच पार्षद जीते थे। उनसे काफी मुस्लिम युवा जुड़े हुए हैं। पिछली बार की महापौर सुनीता वर्मा और उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा दलितों में बड़ा चेहरा हैं। पिछली बार मुस्लिम-दलित गठजोड़ से वह महापौर की कुर्सी तक पहुंचे थे। प्रचार में वह भी कहीं नजर आए।
इन सभी की अतुल प्रधान से दूरी कहें या नाराजगी, सपा की हार का बड़ा कारण रही। सपा के खिलाफ मुस्लिमों की दूरी और बढ़ाने में आग में घी का काम भाजपा के कुशल प्रबंधन ने किया। इससे यह संदेश गया कि भाजपा का मुकाबला सपा से नहीं, बल्कि एआईएमआईएम से है।
ऐसे में मुस्लिमों को लगा कि अगर हार में ही वोट करना है तो फिर ऐसी पार्टी के व्यक्ति को क्यों न वोट किया जाए जिसका मुखिया ओवैसी सार्वजनिक मंचों से मुस्लिमों की बात मजबूती से रखता है। सपा मुखिया अखिलेश यादव उनकी बात उतनी मजबूती से नहीं कहते। उन्होंने रोड शो भी किया तो आधा। आधी जगह लोग उनका दोपहर से शाम तक इंतजार करते रहे और वह उन्हें देख भी नहीं पाए।
कहीं तो चूक रही है, समीक्षा करेंगे
सपा के जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का कहना है कि कहीं न कहीं उनके प्रबंधन में चूक हुई है। मुस्लिम वोट बैंक उनके साथ था। चुनाव से दो दिन पहले ऐसा हुआ, जिससे मुस्लिमों का रुझान एआईएमआईएम की तरफ हो गया। इसकी समीक्षा करेंगे और जो कमियां रही हैं, उनको दूर करेंगे।