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रतिराम तेल डिपो: जांच अधूरी, 84 दिनों बाद भी चार्जशीट नहीं हुई पूरी, परतापुर पुलिस के पाले में गेंद

Sun, 01 Dec 2019 12:07 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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पेट्रोल पंप - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो में पाए गए अवैध केरोसिन स्टॉक के मामले में अब गेंद परतापुर पुलिस के पाले में है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे में दो माह में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है। मुकदमा दर्ज हुए 84 दिन हो चुके हैं। लेकिन अभी तक जांच एक कदम भी बढ़ती नजर नहीं आ रही है। जब तक डिपो के भूमिगत टैंकों की खोदाई नहीं होगी, तब तक जांच पूरी नहीं हो सकती है। 
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एडीएम सिटी अजय तिवारी के नेतृत्व में 7 सितंबर को केरोसिन के थोक विक्रेता रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो पर छापा मारा गया था। जहां पर 71888 लीटर केरोसिन का अवैध स्टॉक मिला था। इस मामले में आपूर्ति विभाग ने फर्म के मालिक संजय गुप्ता और प्रबंधक विक्की के खिलाफ परतापुर थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आशंका जताई थी कि भूमिगत टैंकों में कुछ छेड़छाड़ की हुई है। 

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इस मुकदमे के बाद पुलिस ने कई बार संजय गुप्ता और प्रबंधक विक्की की गिरफ्तारी को दबिश देने की बात कही। लेकिन वह गिरफ्तार नहीं हो सके। इस बीच दोनों को न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई। लेकिन पुलिस की जांच आज तक पूरी नहीं हुई।

अहम बात ये है कि इस पूरे मामले में भूमिगत टैंक सबसे ज्यादा अहम है। जब तक उनकी खोदाई नहीं हो जाती है, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार एक तरफ जहां टैंकों में भरे तेल से आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे की धारा पुख्ता होगी, वहीं यदि भूमिगत टैंक में छेड़छाड़ पाई जाती है तो मुकदमे में अतिरिक्त धाराएं भी बढ़ेंगी। जिससे संजय गुप्ता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के संरक्षण की चर्चा 
संजय गुप्ता के संबंध पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से काफी घनिष्ठ हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो जिस दिन छापा मारा गया था, उसी दिन संजय गुप्ता के पक्ष में खुलकर पैरवी की थी। ऐसे में पुलिस का ढुलमुल रवैया पूरी तरह इन चर्चाओं को बढ़ावा दे रहा है। 
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