इस मुकदमे के बाद पुलिस ने कई बार संजय गुप्ता और प्रबंधक विक्की की गिरफ्तारी को दबिश देने की बात कही। लेकिन वह गिरफ्तार नहीं हो सके। इस बीच दोनों को न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई। लेकिन पुलिस की जांच आज तक पूरी नहीं हुई।
अहम बात ये है कि इस पूरे मामले में भूमिगत टैंक सबसे ज्यादा अहम है। जब तक उनकी खोदाई नहीं हो जाती है, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार एक तरफ जहां टैंकों में भरे तेल से आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे की धारा पुख्ता होगी, वहीं यदि भूमिगत टैंक में छेड़छाड़ पाई जाती है तो मुकदमे में अतिरिक्त धाराएं भी बढ़ेंगी। जिससे संजय गुप्ता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के संरक्षण की चर्चा
संजय गुप्ता के संबंध पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों से काफी घनिष्ठ हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो जिस दिन छापा मारा गया था, उसी दिन संजय गुप्ता के पक्ष में खुलकर पैरवी की थी। ऐसे में पुलिस का ढुलमुल रवैया पूरी तरह इन चर्चाओं को बढ़ावा दे रहा है।