निगरानी में निगम और देहात में ग्राम पंचायत अधिकारी
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक महानगर में नगर निगम, मवाना और सरधना में नगर पालिका कर्मचारी, नगर पंचायतों में पंचायत कर्मचारी और गांवों में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर ग्राम पंचायत सचिव की ड्यूटी लगाई गई है। ये सभी कर्मचारी सरकारी रिपोर्ट में अपने सामने राशन का वितरण दर्शाते हैं।
हर महीने पांच से 20 तारीख तक खुलनी चाहिए दुकानें
प्रत्येक कार्ड धारक को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन मिले, इसके लिए सरकार ने दुकानें खोलने की तिथि और समय भी निर्धारित किया है। नियमानुसार हर माह पांच से 20 तारीख तक प्रतिदिन दुकान खुलनी चाहिए।
इतना ही नहीं प्रत्येक दिन कम से 300 कार्ड धारकों को राशन वितरित किया जाना चाहिए। लोगों का आरोप है कि इस आदेश का कुछ राशन डीलर अनुपालन कर रहे हैं, जबकि अधिकतर दुकानदार न तो समय पर दुकानें खोलते हैं और न ही पूरा राशन दे रहे हैं।
सुधार नहीं हो पा रहा: जिलापूर्ति अधिकारी
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने का मतलब अपने सामने राशन वितरण करना है। काफी कर्मचारी ऐसे हैं जो मौके पर मिलते ही नहीं हैं। कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन सुधार नहीं हो सका है। - विनय सिंह, जिलापूर्ति अधिकारी।
केस एक
नई बस्ती लल्लापुरा निवासी शकुंतला ने बताया कि परिवार में पांच सदस्य हैं। साबुन गोदाम की केवीएस राशन की दुकान से राशन लेते हैं। एक यूनिट का कम राशन दिया जाता है। शिकायत करते हैं तो कोई सुनता ही नहीं।
केस दो
श्यामनगर निवासी जैबुन्निशा ने बताया कि श्यामनगर में ही गीता गुप्ता की दुकान से राशन लेते हैं। कई बार चावल मिलता ही नहीं है। दुकान कहते हैं कि चावल आया ही नहीं है।
केस तीन
ब्रह्मपुरी निवासी रज्जो देवी ने बताया कि कपिल शर्मा की दुकान से राशन लेते हैं। दुकान समय पर नहीं खुलती। परिवार में तीन सदस्य हैं। कभी पूरा राशन नहीं मिलता है। शिकायत करेंगे तो राशन कार्ड खत्म करा दिया जाएगा।
केस चार
माधवपुरम निवासी शीतला देवी बताती हैं कि परिवार में तो चार सदस्य हैं। राशन में दो अन्य लोगों के नाम हैं। राशन डीलर नरेश है, अंगूठा हमसे लगवाता है और दो अन्य लोगों का राशन हजम कर जाता है।