दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रैक के लिए हाईवे को साफ करने पहुंची एनसीआरटीसी की टीम का लोगों ने विरोध कर दिया। कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, मकान या दुकान नहीं तोड़ने देंगे। टीम ने लोगों को एक सप्तह का समय दिया है।
रैपिड रेल के दूसरे चरण करीब 34 किमी में दुहाई से शताब्दीनगर तक काम होना है। इसके लिए शताब्दीनगर में पिलर निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परतापुर ओवरब्रिज से संजय वन तक सड़क चौड़ीकरण भी कर दिया गया है। वहीं, अब परतापुर तिराहे से आगे सड़क चौड़ीकरण कर पिलर का कार्य किया जाना है।
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मोहिउद्दीनपुर से भूड़बराल की तरफ सड़क पर 60 से ज्यादा मकान और दुकानें हैं। इन संपत्तियों को ध्वस्त कर सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जाना है। बुधवार को एनसीआरटीसी के इंजीनियर, तहसील के कर्मचारी और ग्राम प्रधान ने जेसीबी के साथ पहुंचकर खरखौदा मोड़ से दुकानों को हटाना शुरू कर दिया। जिसका लोगों ने विरोध कर दिया।
लोग बोले, पहले नोटिस दो
एनसीआरटीसी का कहना है कि स्थानीय निवासियों को ध्वस्तीकरण की सूचना दे दी गई थी। लेकिन लोगों का आरोप है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर भी की जा चुकी है। जब तक मुआवजा तय नहीं होगा, ध्वस्तीकरण नहीं होने देंगे। इस मौके पर व्यापारी राहुल मित्तल, अजय कुमार, आनंद, विपिन आदि मौजूद रहे।
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