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रैपिड रेल: ब्रह्मपुरी-मेरठ सेंट्रल के लिए जमीन पर सहमति, एनसीआरटीसी और जिला प्रशासन करेगी सर्वे

Thu, 29 Aug 2019 05:15 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने रफ्तार देनी शुरू कर दी है। 82 किलोमीटर के प्रोजेक्ट के पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक 16.5 किमी में निर्माण शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं। वहीं, ब्रह्मपुरी और मेरठ सेंट्रल स्टेशन के लिए कुल सात हजार वर्ग मीटर जमीन पर हाफिजाबाद और मेवला के भू-स्वामियों की तरफ से सहमति मिल गई है।

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मेरठ क्षेत्र में निर्माण शुरू करने के लिए एनसीआरटीसी जमीन की खोज कर रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन की सहायता से भूमि क्रय समिति की बैठक में किसानों से जमीन पर चर्चा हो रही है। बुधवार को कलक्ट्रेट स्थित बचत भवन में एडीएम भूमि/अध्याप्ति, एनसीआरटीसी मुख्य परियोजना प्रबंधक की उपस्थिति में रैपिड रेल के लिए ब्रह्मपुरी और मेरठ सेंट्रल स्टेशन के लिए जमीन पर सहमति मिल गई। इसके अलावा बैठक में मोदीपुरम फ्लाईओवर के पास ली जाने वाली प्राइवेट लैंड के लिए सिवाया, मुकर्रबपुर, पल्हैड़ा के भू-स्वामियों को बुलाया गया। इन्होंने भी बैठक में अपनी बात रखी। इसके लिए भी अधिकारियों की टीम सर्वे करेगी।

इतनी जमीन की जरूरत
एचआरएस चौक पर जहां मेरठ सेंट्रल स्टेशन बनाया जाएगा। वहीं, अतुल माहेश्वरी सेतु पर ब्रह्मपुरी स्टेशन होगा। इसमें ब्रह्मपुरी स्टेशन के लिए तीन हजार वर्ग मीटर जमीन और मेरठ सेंट्रल स्टेशन के लिए चार हजार वर्ग मीटर जमीन की जरूरत है। वहीं, ब्रह्मपुरी स्टेशन को एलीवेटेड और मेरठ सेंट्रल स्टेशन को अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। ब्रह्मपुरी स्टेशन का एलाइनमेंट नवीन मंडी से अतुल माहेश्वरी सेतु पर चढ़ना तय किया गया है।

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अब होगा संयुक्त सर्वे

बैठक में भू-स्वामियों के साथ सहमति होने पर एडीएम वित्त के साथ एनसीआरटीसी की टीम संयुक्त निरीक्षण करेगी। यह संयुक्त सर्वे एक सप्ताह बाद शुरू कर दिया जाएगा। स्टेशन और एलाइनमेंट के लिए ली जाने वाली जमीन का भी निरीक्षण किया जाएगा। मौके पर जाकर जमीन का सर्वे कर रेट तय किया जाएगा। इसके बाद ही एनसीआरटीसी प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगी।

दौराला पर कमिश्नर लेंगी फैसला
एनसीआरटीसी को मेरठ के सबसे अंतिम स्टेशन मोदीपुरम से आगे डिपो के लिए जमीन लेनी है। इसकी प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है। लेकिन फाइनल नहीं हो सकी है। एनसीआरटीसी की तरफ से एक हजार वर्ग मीटर के 24 लाख रुपये तय किए गए हैं। लेकिन किसान सहमत होने को तैयार नहीं है। अब इस बारे में अंतिम फैसला कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम के पास है।
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