हेल्पलाइन पर जानकारी लेने वालों को बताया गया कि रमजान अल्लाह की खास इबादत का महीना है, जिसमें मुसलमानों को गुनाहों से तौबा कर खूब इबादत करनी चाहिए। रोजे रखना इस्लाम के पांच अरकनों में से एक है।
सवाल:- देवबंद मोहल्ला दीवान निवासी फातिमा परवीन ने पूछा कि उनकी बहन सहरी में उठ नहीं पाई और वह पूरे दिन रोजे की नियत भी नहीं कर सकी, लेकिन पूरे दिन भूखी प्यासी रही और कुछ खाया-पिया नहीं। इफ्तारी से दो घंटे पहले रोजे का ख्याल आया। अब ऐसी सूरत में शरीयत के अनुसार उनका रोजा होगा या नहीं?
जवाब- शरीयत कहती है रोजे के लिए नियत शर्त है। अगर किसी ने रोजे का इरादा नहीं किया और तमाम दिन कुछ खाया पिया भी नहीं, तब रोजा नहीं होगा।
सवाल:-कमेला कालोनी निवासी अबूजर ने मालूम किया कि रोजे की हालत में वह आंख में सुरमा या काजल लगा सकते हैं। अगर उसका असर हलक में महसूस हो रहा हो तो इससे रोजे पर कोई असर पड़ेगा।
जवाब:- रोजे की हालत में सुरमा काजल लगाया जा सकता है। इससे रोजे पर कोई असर नहीं आता। अगर सुरमे का असर हलक में महसूस भी हो रहा हो, तब भी रोजा सलामत रहेगा।
सवाल:- देहरादून चौक निवासी इदरीस ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति जिस पर जकात फर्ज है और वह अपनी पत्नी को या पत्नी पति को जकात दे तो शरीयत में कहां तक सही है। ऐसा करना सही है।
जवाब:- पत्नी को अगर पति या पति को अगर पत्नी जकात अदा करे तो यह जायज नहीं है और ना ही जकात अदा होगी।
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