राम मंदिर... शिला पूजन से एकजुट हुए थे युवा
मेरठ। राम मंदिर के आंदोलन में मेरठ का बड़ा योगदान रहा है। वर्ष 1989 से 1992 के बीच कई कार्यक्रम हुए। शिला पूजन ने युवाओं को एकजुट करने का काम किया था।
विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने राम मंदिर को लेकर प्रदेश में मुहिम तेज की। इसके तहत शहरों में कार्यक्रम आयोजित हुए। मेरठ में भी राम मंदिर से जुड़ा आंदोलन यादगार बना। मेरठ को दो भागों शहर और कैंट में बांटा गया। शहर का दायित्व अनिल रस्तोगी को मिला, जबकि कैंट क्षेत्र की जिम्मेदारी दिनेश गोयल (कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष) ने संभाली। वर्ष 1989 से 1992 के बीच कैंट में इतने कार्यक्रम आयोजित हुए कि प्रशासन की नींद उड़ गई। कार्यक्रम संयोजक रहे दिनेश गोयल बताते हैं कि कार्यक्रमों की सफलता से शासन-प्रशासन इतना बेचैन हुआ कि एलआईयू के लोग 24 घंटे कैंट क्षेत्र खासकर उनके घर की निगरानी करते थे। विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल, कलराज मिश्र, विनय कटियार, देवकी नंदन, कृपा शंकर सरीखे फायर ब्रांड नेता यहां के कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराने लगे। सरकार ने काफी लोगों पर मुकद्दमे भी कराए, लेकिन मुहिम कमजोर नहीं पड़ी। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, पूर्व महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, प्रदीप तिवारी, केदारनाथ जैन मुहिम में आगे रहे। दिनेश गोयल बताते हैं कि युवाओं को संदेश देने के लिए उनकी ओर से शिला पूजन का कार्यक्रम हुआ। घर-घर जागरूकता लाने के लिए शिला पूजन कराया। हर घर से एक ईंट के रूप में एक रुपया लिया जाने लगा। जब भी यात्रा निकलती युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते। उनकी ओर से जैन समाज को एकत्र किया गया। जैन मुनि द्वारा कई जगह शिला पूजन संपन्न कराया। जगह जगह श्रीराम कथा कराना और राम लीला का आयोजन कराना भी इसी मुहिम का हिस्सा रहा।