परिवार में नाम में राम जोड़ने की पंरपरा सात पीढ़ी पहले शुरू हुई थी। रामकुमार के बुजुर्गों खुशीराम, खुशीराम के बेटे लालाराम और लालाराम के बेटे रामसिंह ने इसे जारी रखा। राम मंदिर निर्माण के आंदोलन की अगुवाई करने वाले स्वामी वामदेव से परिवार का गहरा नाता रहा है। स्वामी वामदेव हर साल एक सप्ताह इसी परिवार में रुकते थे।
रामकुमार ने खेत में संतों के लिए बनाई कटिया
- फोटो : Amar Ujala
रामकुमार के अनुसार एक बार परिवार में कुछ ठीक नहीं चल रहा था। पशु व घर के सदस्य बीमार हो गए थे। आर्थिक संकट गहरा गया था। स्वामी वामदेव के कहने पर ही रामसिंह ने घर में पहली बार रामायण का अखंड पाठ कराया था। अखंड पाठ समाप्त होते ही सारी विपत्तियां दूर हो गईं। इससे राम नाम के प्रति आस्था और प्रगाढ़ हो गई। अब परिवार में हर महीने अखंड रामायण का पाठ और भंडारा कराया जाता है।
पुरुषों के नाम
रामकुमार, रामदास, रामफूल, रामसिंह, रामभजन, रामफल, रामरंग, रामहरि, रामजी, रामद, रामदेव, रामलखन, रामकृष्ण, रामगोपाल, रामकिशन, राम माधव, राम राघव, रामअंश, रामसुमन, रामबीर, खुशीराम, लालाराम, गिरधारी राम, आत्माराम, चाहींराम, गोविंद राम, मुकुंद राम, नंदराम, बलराम, आदित्य राम, रामवंश, केशव राम, गोविंद राम, यशराम, शिवराम और शिवाराम।