मालन नदी का भी स्तर बढ़ने से गांव रावली के पास मालन के रपटे पर डेढ़ फीट तक पानी चल रहा है। गांव वालों ने रपटे पर पैदल, बाइक या साइकिल से निकलना बंद कर दिया है। गांव रपटा एक दर्जन गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ता है। अगर पानी थोड़ा और बढ़ा तो यहां पर पैदल या अन्य वाहनों से आवागमन भी बंद हो जाएगा। इसके बाद आने जाने के लिए केवल नाव का ही सहारा रहेगा।
रावली क्षेत्र में कटान को रोकने के लिए पिछले साल और इस साल भी स्टड बनाए गए हैं। गंगा के तेज बहाव के आगे चार स्टड रातों रात बैठ गए हैं। इसे गांव वाले कटान की संभावना के चलते खौफ में आ गए हैं।
इनमें से दो स्टड तो महीना भर पहले ही बनाए गए थे। गंगा रावली क्षेत्र में भी दो किलोमीटर बैराज की ओर खेतों में कटान कर रही है। गंगा व मालन का पानी गांव ब्रह्मपुरी में भर जाता है लेकिन अभी तक गंगा का पानी गांव में नहीं आया है।
अब भी गंगा के बीच टापू पर रह रहे वन गुर्जर
गंगा के बढ़े जलस्तर और विकराल रूप को देखकर हर कोई खौफजदा है लेकिन वन गुजर्रों के परिवार अब भी गंगा की धारा के बीच टापू पर रह रहे हैं।
गांव रावली से शुक्रताल की ओर गंगा के बीच बने टापू पर चार परिवार में 12 सदस्य अपने सैकड़ों पशुओं के साथ रह रहे हैं। अभी टापू पर गंगा का पानी नहीं चढ़ा है। ये वन गुर्जर दूध बेचकर गुजारा करते हैं। अब भी ये नाव से रोज तीन क्विंटल दूध बिजनौर की ओर बेचने के लिए ला रहे हैं।
नया पुल बनने से मिली राहत
मंडावर में मालन नदी का नया बनने से राहगीरों को बहुत राहत मिली है। पहले रपटे पर पानी आने से यहां से आवागमन एकदम बाधित कर हो जाता था। लेकिन अब रपटे की बराबर में पुल काफी ऊंचा करके बनाया गया है। इस पुल पर पानी नहीं आता है और वाहनों को यहीं से गुजारा जाता है।