08 दिन में आय हुई आधी, रूट डायवर्जन केचलते यात्रियों ने किया किनारा
कांवड़ यात्रा के चलते रोडवेज ने हरिद्वार रूट के लिए 75 से ज्यादा बसों का संचालन किया था। इन बसों में न केवल बाहरी कांवड़ियों ने सफर किया बल्कि स्थानीय कांवड़ियों ने भी बसों का सहारा लिया। रोडवेज सूत्रों ने बताया कि सफर करने वाले कांवड़ियों में से काफी कांवड़ियें ऐसे थे जिन्होंने कम किराया दिया या फिर किराया ही नहीं दिया।
इस तरह गिरी रीजन की आय
डिपो रोजाना औसत आय कांवड़ के दौरान आय
मेरठ 18 लाख करीब 10 लाख
भैसाली 25 लाख करीब 11 लाख
सोहराबगेट 22 लाख करीब 11 लाख
गढ़मुक्तेश्वर 12 लाख करीब 07 लाख
बड़ौत 14 लाख करीब 06 लाख
कुल आय 91 लाख करीब 45 लाख
भैसाली बस अड्डे से दौड़ने लगीं बसें
कांवड़ यात्रा के दौरान अस्थायी रूप से सोहराबगेट बस अड्डे पर शिफ्ट हुआ भैसाली बस अड्डा अपने मूल स्थान पर लौट आया। बसों के मूल रूट से चलने पर यात्रियों को राहत मिलना शुरू हो गई। हालांकि अभी सभी बसें नहीं लौटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार तक सभी बसें अड्डे पर लौट आएंगी।
कांवड़ यात्रा के चलते भैसाली बस अड्डे को 22 जुलाई को सोहराबगेट अड्डे पर शिफ्ट किया गया था। यहां से दिल्ली और गाजियाबाद जाने वाली बसों को वाया किठौर-हापुड़ और मुजफ्फरनगर रूट की बसों को वाया मवाना-मीरापुर रूट से संचालित किया जा रहा था। बुधवार दोपहर बाद बसें अपने मूल रूट से संचालित होने लगीं।
कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रेनों की हालत
- फोटो : अमर उजाला