उधर, शासन की सख्ती के बाद गांव-गांव छापेमारी की गई तो मौत का सामान बरामद होने लगा। अधिकारियों के अनुसार यहां कहीं भी कच्ची शराब नहीं बन रही थी। फिर एक हजार लीटर से अधिक कच्ची शराब, दस हजार लीटर लहन और बीस से अधिक शराब की भट्ठियां कैसे से पकड़ी गईं। यही नहीं जिस शराब से पीकर लोगों की मौत हुई उस जहरीली शराब को बनाने में लिप्त आरोपी भी सहारनपुर के ग्राम पुंडेन एवं चुन्हैटी शेख के रहने वाले हैं।
शिकायतों को नजरअंदाज करने का है नतीजा
लोग लगातार शिकायतें कर रहे थे कि गांवों में अवैध रूप से शराब बनाकर बेची जा रही है, लेकिन न तो आबकारी विभाग सुनने को तैयार था और न ही पुलिस के कान पर जूं रेंग रही थी। आरोप लगते रहे कि आबाकरी एवं पुलिस के संरक्षण में ही जहरीला सामान बिक रहा है। जिस कारण सुनवाई नहीं हो रही है। मौतों के बाद जब कार्रवाई की तलवार लटकी तो धड़ाधड़ छापामारी हुई और शराब बनाने तथा बेचने वालों पर कार्रवाई होने लगी।
चार दिन में हुई कार्रवाई
- 9 फरवरी --- 39 लोगों को गिरफ्तार किया, 355 लीटर कच्ची शराब, 3600 लीटर लहन एवं 60 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद कर आठ भट्ठियां पकड़ी।
- 10 फरवरी--- शराब बनाने की पांच भट्ठी ध्वस्त की गई, 389 लीटर कच्ची शराब, 2700 लीटर लहन, 192 लीटर देशी शराब पकड़ी गई।
- 11 फरवरी--- 28 लोगों को गिरफ्तार किया, 261 लीटर कच्ची शराब, 695 लीटर लहन, साढ़े चार किलो यूरिया, लगभग 300 लीटर देशी एवं अंग्रेजी शराब, 22 बोतल अरुणाचल प्रदेश की शराब, ढाई लीटर रेक्टिफाइड, शराब बनाने की तीन भट्ठी एवं उपकरण बरामद किए।
- 12 फरवरी --- 28 लोगों को गिरफ्तार
किया, 183 लीटर कच्ची शराब एवं शराब बनाने के उपकरण, 59 लीटर देशी, अंग्रेजी शराब, 2400 लीटर लहन, शराब बनाने की चार भट्टी पकड़ी।
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