शासन की इतनी सख्ती के बावजूद अवैध मीट प्लांटों का खेल नहीं रुक रहा है। मंगलवार देर रात पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम ने गांव अल्लीपुर में छापा मारकर अवैध रूप से चल रही मीट फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। मौके से भारी मात्रा में पशुओं के अवशेष मिले। फैक्ट्री संचालक फरार हो गया जबकि पुलिस ने सैंपल भरते हुए फैक्ट्री के तीन गार्डों को हिरासत में ले लिया। इस फैक्ट्री से एक भी दस्तावेज नहीं मिला। अहम सवाल यह भी है कि इतनी सख्ती के बावजूद भी मीट प्लांट क्षेत्र में चल रहे हैं।
पुलिस के अनुसार खरखौदा थाना क्षेत्र के गांव अल्लीपुर निवासी कुछ लोगों ने अल्लीपुर रोड पर यूनिवर्सल इंडिया के ठीक पीछे चल रही अल खबीब नाम की अवैध मीट फैक्ट्री चलने की सूचना दी थी। जिसके बाद एसडीएम सदर के निर्देश पर गठित टीम में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय चतुर्वेदी, प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता अंकित सिंह और खरखौदा पुलिस ने संयुक्त छापामारी की। इस दौरान फैक्ट्री संचालक मौके से भाग निकले। पुलिस ने गार्डों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि फैक्ट्री को मेरठ निवासी कल्लू डॉन चलाता है। गार्डों से फैक्ट्री मालिक को फोन कराया गया। टीम ने गार्डों से फैक्ट्री संचालन से संबंधित कागज मांगे तो गार्डों ने कोई कागजात दिखाने से इंकार कर दिया।
टीम को मौके पर प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी, पशुपालन विभाग की एनओसी, एपीडा का लाइसेंस सहित कोई भी कागजात नहीं मिल सका। टीम ने मौके पर पडे़ मीट के नमूने लिए। बाद में फैक्ट्री मालिक द्वारा भेजे गए मेरठ निवासी एक व्यापारी को टीम ने मौके पर पडे़ मीट को सुपुर्द करते हुए मीट वहां से हटाने को कहा।
मुकदमा दर्ज कराया
फैक्ट्री के संचालन से क्षेत्र में फैल रही दुर्गंध के मामले में अंकित सिंह ने फैक्ट्री संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मौके से एक पल्सर बाइक व मैजिक कब्जे में ले ली। पशु चिकित्सक डॉ. संजय चतुर्वेदी के अनुसार बडे़ स्लॉटर हाउसों से पशुओं के कटान के बाद निकले अवशेषों में पशुओं के पेट सहित कई हिस्सों को इस अवैध फैक्ट्री में खरीदकर लाया जाता है। यहां पर पहले अवशेषों की सफाई कर उन्हें पकाया जाता है तथा फिर सुखाया जाता है। सूखने के बाद अवशेष विदेशों में सप्लाई किया जाता है, जिनसे कुत्तों के लियेे कई प्रकार का खाना तैयार किया जाता है।
छापामारी में झोल, कई अहम सवाल
इस छापामारी के बाद कई सवाल उठ गए हैं। छापामारी में प्रशासन और एमडीए को क्यों नहीं शामिल किया गया। छापे के बाद मौके से बरामद मीट तो सुपुर्दगी में दे दिया गया। लेकिन फैक्ट्री को सील क्यों नहीं किया गया। टीम ने तो मौके पर फैक्ट्री का संचालन बंद करा दिया। लेकिन क्या अब फैक्ट्री नहीं चलेगी। फैक्ट्री के संचालन से संबंधित जब कोई कागज ही नहीं मिल सका तो फैक्ट्री पर तुरंत ही सील क्यों नहीं लगाई गयी। छापामारी में प्रदूषण होना पाया तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज करा दिया गया। लेकिन केवल फैक्ट्री संचालक को सख्त हिदायत दी गयी है कि फैक्ट्री को न चलाएं। लेकिन फैक्ट्री सील करने की जरूरत क्यों नहीं थी।
पीछा करते पहुंची थी गश्ती पुलिस
सूचना है कि पुलिस ने मंगलवार रात गश्त के दौरान पल्सर बाइक का बाइक पीछा किया तो बाइक चालक एक प्लांट के बाहर बाइक खड़ी कर प्लांट में घुस गया था। पीछा करते पुलिस जब प्लांट के अंदर घुसी तो मौके पर भारी मात्रा में मीट मिला तो आगे की कार्रवाई गयी। -अरविंद सिंह, एसडीएम सदर
यह प्रशासन या एमडीए का काम
फैक्ट्री को सील करने की अनुमति प्रशासन या एमडीए को ही है। वह तो केवल मीट के बारे में जांच कर बता सकता है। उन्होंने यही किया और सैंपल भरे गए हैं। -डॉ. संजय चतुर्वेदी, पशु चिकित्सा अधिकारी
पुलिस केवल शांति व्यवस्था के लिए
पुलिस तो केवल मौके पर शांति व्यवस्था के लिए होती है, जोकि किया गया। बाकी कार्रवाई तो प्रशासन और दूसरे विभाग ही कर सकते हैं। -संदीप सिंह, इंस्पेक्टर खरखौदा