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स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला, स्टाफ मना रहा छुट्टी

Thu, 06 Apr 2017 12:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री से लेकर शासन में बैठे उच्च अधिकारी हर दफ्तर में स्टाफ की समय पर दफ्तर आने पर जोर दे रहे हैं। सख्त आदेश है कि कहीं पर स्टाफ देरी से आता है या गायब रहता है तो तत्काल कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित रहने वाले स्टाफ की रोज मुख्यालय स्तर पर रिपोर्ट मांगी जा रही है, लेकिन इस व्यवस्था के बाद भी स्वास्थ्य केंद्रों के हालत नहीं सुधरे हैं।
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बुधवार को सरकारी अवकाश था, ऐसे में व्यवस्था है कि अवकाश के दिन भी आधे दिन ओपीडी होगी। यानी ग्रामीण क्षेत्र में आधे दिन तक ओपीडी होनी थी। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को सुबह 10 से 11 बजे की बीच स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया तो स्थिति कुछ और ही निकली। सीएचसी से लेकर पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्र तक स्टाफ नदारद था। कंडीशन साफ बता रही है कि उपस्थिति रिपोर्ट में मुख्यालय को गुमराह किया जा रहा है। सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने आचार संहिता के समय और उससे पहले पीएचसी के निरीक्षण कराए थे जिनकी आख्या रिपोर्ट पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों की हालत में भला सुधार कैसे होगा?

केस-1-  दुल्हैडा पीएचसी
 स्वास्थ्य केंद्र में मुख्य गेट पर ताला लगा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि पीएचसी खुलती तो है, लेकिन स्टाफ चंद घंटे ही रहता है, लेकिन आज कोई भी नहीं आया। करीब 20 मिनट तक टीम वहीं रही लेकिन कोई नहीं आया। जबकि यहां पर दो चिकित्सकों को तैनाती है
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केस - 2- सिवाया उप स्वास्थ्य केंद्र
स्वास्थ्य उपकेंद्र पर टीम पहुंची। यहां बराबर में ही राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है। दोनों पर ही ताला लगा था। वहां पर मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि यहां तो कभी कभार ही कोई आता है। अक्सर ताला ही लटका रहता है। उपकेंद्र के बाहर बने नोटिस बोर्ड पर भी कोई सूचना अंकित नहीं थी।

केस-3- कस्तला पीएचसी
केंद्र के मुख्य गेट पर ताला लगा था। बच्चे पीएचसी के अंदर क्रिकेट खेल रहे थे। उन्होंने बताया कि यहां कोई नहीं आता। पीएचसी के बाहर काफी कबाड़ खड़ा था। बताया जा रहा है कि यहां सिर्फ फार्मासिस्ट तैनात है जो कभी कभार आता है।

केस- 4- भावनपुर सीएचसी
सीएचसी के इमरजेंसी गेट पर ताला लगा था। बराबर का गेट खुला था। इससे टीम अंदर पहुंची तो कुछ कमरे खुले थे और कुछ पर ताला लगा मिला। चिकित्साधिकारी का कक्ष भी बंद था। वहां मौजूद एक दो सफाई कर्मचारी से पूछा गया कि डॉक्टर साहब और बाकी स्टाफ कहां है तो नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात में डॉक्टर साहब चले जाते हैं, जबकि सीएचसी पर आठ चिकित्सकों का स्टाफ तैनात है।
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