पुण्य कर्म ही सुख शांति का मार्ग: भारत भूषण मुनिराज
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 14वें दिन सोमवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आचार्य 108 भारतभूषण मुनिराज ने कहा कि पुण्य कर्म ही सुख शांति का मार्ग है। जवानी तो धन कमाने में बीत जाती है और बुढ़ापा सेहत के लिए उसी धन को गंवाने में। अब अपने में विचार कर लेना कि धन कमाना है कि पुण्य। धन तो अनेक कारणों से गंवाना पड़ सकता है, परंतु पुण्य जितना करोगे उतना ही बढ़ेगा और जीवन पर्यंत सुख शांति देगा ही, मरणोपरांत भी सद्गति प्रदान करेगा।
सोमवार को स्वर्ण कलश से कमल कुमार जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य पारस जैन व अरुण कुमार जैन को मिला। दीप प्रज्ज्वलन प्रियंका जैन, रीतू जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाए। 101 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
भक्तामर पाठ का शुभारंभ अंजू जैन, अमित मेहता जैन, मधु, अजय, रीना, अतुल जैन ने संस्कृत भाषा में किया। विधान पाठ में भगवान के सुंदर भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शिखरचंद जैन, राजीव जैन, अनिल कुमार जैन, का सहयोग रहा।