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एक्शन में योगी, समाजवादी पेंशन योजना में फर्जीवाड़े की होगी जांच

Tue, 23 May 2017 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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एक्शन में सीएम योगी
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समाजवादी पेंशन योजना में भारी फर्जीवाड़ा हुआ। तीन वर्षों में जारी पेंशन योजना में आधे से ज्यादा अपात्रों को पात्र बनाकर पेंशन जारी की गई। योगी सरकार बनने पर तत्काल प्रभाव से इस पर जांच बैठा दी गयी। लेकिन डीएम द्वारा तय की गयी 15 मई की समय सीमा बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो पायी है। खास बात ये है कि जिन ग्राम पंचायत सचिवों की रिपोर्ट पर पेंशन पात्रता जारी हुई थी, अब जांच भी उन्हीं को सौंपी गयी है। 
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ये है समाजवादी पेंशन योजना 
तत्कालीन सपा सरकार ने गरीब और असहाय लोगों के लिए समाजवादी पेंशन योजना शुरू की थी। योजना में दिए गए लक्ष्य का 40 प्रतिशत अल्पसंख्यक वर्ग के लिए था। योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन जारी की गयी थी। पात्रता के लिए शर्त थी कि किसी भी सरकारी पेंशन योजना से आवेदक स्वयं या उसके परिवार का व्यक्ति लाभ नहीं उठा रहा होगा। इसके अलावा आवेदक के परिवार में कोई भी नौकरी न करता हो, कोई वाहन या मशीनरी न हो और परिवार में .5 हेक्टेयर संचित तथा एक हेक्टेयर असंचित से अधिक भूमि न हो। जबकि शहरी क्षेत्र में इन्हीं नियमों के बीच आवेदक के परिवार में 25 वर्ग गज कवर्ड एरिया से अधिक का आवास नहीं होना चाहिए। 

यहां लाभार्थियों की संख्या में खेल
प्रदेश सरकार ने यह योजना 2013-14 में लागू करते हुए मेरठ जनपद को 55 हजार पात्रों को पेंशन का लक्ष्य दिया था। इसके अगले वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर 60500 और अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 में 67100 पात्रों  का लक्ष्य दिया गया। लेकिन इन तीन वर्षों में मेरठ में पेंशन लाभार्थियों की संख्या 67502 हो गई, जिनका पैसा शासन से हर माह रिलीज होता रहा।
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योगी सरकार में रुकी पेंशन 

समाजवादी पेंशन योजना की होगी जांच
19 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने शपथ ली। तब तक 65081 लाभार्थियों की पेंशन का धन आ चुका था। लेकिन इसके आगे के लोगों का धन शासन ने रोक दिया। क्योंकि समाजवादी पेंशन में भारी फर्जीवाड़े की शिकायत थी। ऐसे में शासन से इस पर जांच बैठाने के आदेश दे दिए थे। जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में पत्र जारी कर 15 मई तक सभी लाभार्थियों की जांच करते हुए दोबारा सत्यापन के आदेश दिए थे। 

लेखपालों का इंकार
इस फर्जीवाड़े की जांच लेखपालों ने आदेश के बावजूद करने से मना कर दी। उनका कहना था कि इस विभाग का काम ग्राम पंचायत सचिव करते हैं, उनसे ही जांच करायी जाए। जिसके बाद ग्राम पंचायत सचिवों को इसकी जांच सौंप दी गयी। 

इसी पर उठे सवाल
लेकिन इस पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि एक तरफ जहां समय सीमा बीतने के बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आयी है। वहीं, जिन ग्राम पंचायत सचिवों की रिपोर्ट में अपात्र लोग योजना के पात्र बने थे, अब उन्हीं से जांच कराने पर सही रिपोर्ट सामने आ पाएगी, यह बड़ा सवाल है। 

कहां गए 108 अफसर
इस जांच के लिए 108 अधिकारियों की अलग से जांच टीम गठित की गयी थी। लेकिन उनकी तरफ से भी कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है। 

आधे से ज्यादा हैं अपात्र 
देहात क्षेत्र में इस योजना के तहत सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हुआ है। आधे से ज्यादा लाभार्थी ऐसे हैं जो इस योजना की पात्रता में किसी भी तरह नहीं आते हैं। बावजूद इसके राजनैतिक दबाव और साठगांठ से लाभार्थी सूची में शामिल होकर पेंशन पाने लगे। 

जिले में पेंशन पाने वालों की स्थिति 
ब्लॉक (लाभार्थी) 
दौराला (4943), हस्तिनापुर (4539), जानीखुर्द (4400), खरखौदा (2707), माछरा (4273), मेरठ (1533), परीक्षितगढ़ (5916), रजपुरा (4313), रोहटा (3860), सरधना (4143), सरूरपुर (4255)
नगर निकाय (लाभार्थी)
बहसूमा (705), दौराला (689), हस्तिनापुर (994), करनावल (126), खरखौदा (249), किठौर (1072), लावड़ (471), मवाना (1633), परीक्षितगढ़ (802), फलावदा (862), सरधना (1144), सिवालखास (302), मेरठ नगर निगम (9537)
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