सदर बाजार थाना क्षेत्र में प्रियंका विश्वास (33) की मौत और उसके पिता उदयभानु विश्वास (76) के बेटी के शव के साथ कई दिन रहने के मामले में पुलिस की जांच जारी है। पुलिस को पता चला है कि प्रियंका ने अगस्त तक इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स किया था। उसके साथ कोर्स करने वाली छात्राओं से भी पुलिस ने पूछताछ की है। उसके पिता की मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए बुधवार से उदयभानु की मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग होगी।
सीओ कैंट एएसपी नवीना शुक्ला ने बताया कि हरिद्वार से लाने के बाद प्रियंका के मोबाइल की जांच की गई। इससे पता चला कि वह इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स करती थी। साथ मेें कोर्स करने वाली छात्राओं से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह काफी अच्छे स्वभाव की थी। हालांकि वह कम बात करती थी लेकिन फोन पर भी उससे बात हो जाती थी। उदयभानु के मोबाइल की भी जांच की गई है। उसके मोबाइल में प्रियंका के पीलिया (जॉन्डिस) से पीड़ित होने पर झाड़-फूंक करने वाले शकील से बातचीत की भी रिकॉर्डिंग मिलीं हैं। सीओ का कहना है कि रिकॉर्डिंग से पता चला है कि शकील ने उनसे कहा है कि वह किसी डॉक्टर से भी इलाज करा लें। आशंका यही है कि बीमारी के कारण ही प्रियंका की मौत हुई है। उदयभानु मानसिक बीमारी से ग्रसित है। इसके चलते मेडिकल कॉलेज में बुधवार से तीन दिन के लिए उसकी काउंसलिंग कराई जाएगी। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी या नहीं।
पांच दिसंबर को दूसरी बार मेरठ से गया था उदयभानु
सीओ का कहना है कि अब तक की जांच में पता चला है कि 26 नवंबर के आसपास प्रियंका की मौत हुई है। पांच दिन उदयभानु शव के साथ रहा और फिर हरिद्वार चला गया। कुछ दिन हरिद्वार में रहने के बाद उदयभानु मेरठ आया और फिर से बेटी के शव के साथ घर में रहा। इसके बाद वह पांच दिसंबर को दोबारा हरिद्वार गया था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले परिजनों ने उसे जाते हुए देखा था।
25 दिन तक भाई के शव के साथ सोता रहा था भाई
मेरठ के शास्त्रीनगर में 12 साल पहले भी 25 दिन तक शव के साथ रहने का मामला सामने आया था। यहां बुजुर्ग डॉ. हरीश बगई की अगस्त 2014 में मृत्यु हो गई थी। उनके छोटे भाई ने शव का अंतिम संस्कार नहीं किया और घर रहता रहा। वह भाई के लिए खाना बनाते थे। वह घर से बाहर नहीं निकलते थे। दुर्गंध रोकने के लिए उन्होंने भी शव पर इत्र छिड़का था। इसके बावजूद दुर्गंध आने पर 6 सितंबर 2014 को मामले का खुलासा हुआ था।
साइकोसिस से ग्रसित हो सकता है उदयभानु ऐसे मामलों में काउंसलिंग के बाद ही यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित व्यक्ति की दिमागी हालत कैसी है। संभव है कि वह साइकोसिस (मनोविकृति) से ग्रसित हो। इसमें संबंधित व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क टूट जाता है। इसमें मतिभ्रम (आवाजें सुनना/अजीब चीजें देखना) होने लगता है। पीड़ित को सोचने और महसूस करने में कठिनाई होती है। वह गलत बातों या विचारों पर दृढ़ता से विश्वास करने लगता है। बोलने में स्पष्टता नहीं रहती। वह दोस्तों व परिवार से दूरी बना लेता है।
डॉ. तरुण पाल, प्रभारी मनोरोग विभाग, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज
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