बैठक में कहा गया कि बहुत से स्कूलों के पास अपनी बसें हैं। ट्रांसपोर्ट शुल्क जीरो हो गया है। ड्राइवर और हेल्पर की सैलरी देनी पड़ रही है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि लॉकडाउन की अवधि का रोड टैक्स माफ किया जाए। गाड़ियों की फिटनेस और इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने की छूट दी जाए।
केसरवानी ने बताया कि 23 शहरों के अलग-अलग स्कूलों से 300-300 वीडियो मंगाई गई थी, जो ऑनलाइन शिक्षण को प्रमाणित करती हैं। ऐसे में वह अपनी इन समस्याओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से भी वार्ता करेंगे।
कोरोना के कारण व्यापार बंद हो गए हैं। कुछ लोगों की नौकरी छूट गई हैं। जो अभिभावक परेशान हैं, उनकी मदद की जाएगी। जो अभिभावक सक्षम है, उन्हें शुल्क देना चाहिए। - राहुल केसरवानी, सचिव सहोदय
जो लोग फीस देने में सक्षम हैं, वे भी नहीं जमा कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल कैसे चलेंगे। शिक्षकों की सैलरी कौन देगा। ऐसे में फीस तो सभी को देनी होगी। बढ़ी हुई फीस कहीं नहीं ली जाएगी। - डॉ. कमेंद्र सिंह, अध्यक्ष मेरठ सहोदय महान