- यूजीसी ने दिए निर्देश-अब ऑनलाइन ही जमा होगी अंडरटेकिंग और कंप्लायंस रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग पर पूरी तरह रोक लगाने और विद्यार्थियों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एंटी रैगिंग अंडरटेकिंग और कंप्लायंस जमा करने की व्यवस्था में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग के लिए किसी तरह का प्रिंटेड एफिडेविट या हार्ड कॉपी जमा नहीं करनी होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी की जाएगी।
यूजीसी ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को एडवाइजरी जारी कर दी है। इसमें संस्थानों से कहा गया है कि यदि वे अभी भी पुरानी व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों से प्रिंटेड एफिडेविट या हस्ताक्षरित दस्तावेज ले रहे हैं तो इसे तत्काल बंद किया जाए। विद्यार्थियों की एंटी रैगिंग अंडरटेकिंग केवल निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। साथ ही संस्थानों को अपनी एंटी रैगिंग कंप्लायंस रिपोर्ट भी समय से ऑनलाइन जमा करनी होगी।
परिसर में लगाए जाएंगे जागरूकता पोस्टर
यूजीसी ने एडवाइजरी के साथ एंटी रैगिंग जागरूकता पोस्टर भी भेजे हैं। इन्हें प्रवेश केंद्र, विभागों, पुस्तकालय, छात्रावास, कैंटीन और परिसर के अन्य प्रमुख स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य नए विद्यार्थियों को रैगिंग विरोधी नियमों और शिकायत की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना है। रैगिंग से संबंधित शिकायत या जानकारी के लिए राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन 1800-180-5522 और helplineantiragging.in पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
छात्रों को समय और खर्च दोनों से राहत
यूजीसी के संयुक्त सचिव डॉ. तेजस प्रद्युम्न जोशी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों और संस्थानों पर अनुपालन का बोझ कम करना, कागज की बचत करना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। प्रवेश के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को एफिडेविट बनवाने और उसकी हार्ड कॉपी जमा करने में समय और अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। ऑनलाइन व्यवस्था से प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी होने के साथ संस्थानों के लिए रिकॉर्ड का डिजिटल प्रबंधन भी आसान होगा।