यूपी में समय से पहले आई गर्मी की तपिश ने गेहूं को झुलसा दिया है। बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। बढ़ते तापमान से वैज्ञानिक और किसान भी चिंतित हैं। यदि मौसम ऐसे ही रहा तो गेहूं समय से पहले पक जाएगा।
इस बार मौसम का मिजाज जनवरी से ही ठीक नहीं है। यदि 1 से 15 जनवरी के बीच का समय छोड़ दें तो सर्दी का ज्यादा असर नहीं दिखा। समय से पहले मौसम गर्म होने का असर फसलों पर भी दिखाई दे रहा है। पहले फरवरी और अब मार्च में ही तापमान 35 तक जा रहा है। यदि आंकड़ों की बात करें तो करीब दो दशक में इस बार मौसम ज्यादा गर्म है। तापमान बढ़ता हुआ 35 के पास ऊपर जा रहा है जो गेहूं की फसल के लिए ठीक नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर ही पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब 40 से 45 प्रतिशत गेहूं की बुवाई 15 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच में होती है। जिस गेहूं की बुवाई जनवरी में हुई है उसके लिए यह मौसम कतई अनुकूल नहीं है। ऐसे मौसम में गेहूं का दाना पतला हो जाएगा और जल्दी पक जाएगा। जिससे उत्पादन पर असर दिखाई देगा। वहीं पूरी यूपी में 36.12 प्रतिशत क्षेत्रफल में गेहूं की बुवाई की गई है। प्रदेश में गेहूं की फसल पर 10 से 15 प्रतिशत तक इस मौसम का असर दिख सकता है।
मेरठ जनपद में पिछले और वर्तमान वर्ष में गेहूं का क्षेत्रफल
- पिछले वर्ष मेरठ में 76 हजार 528 हेक्टेयर में गेहूं लगाया गया था।
- वर्तमान में 77 हजार 5 सौ 70 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है।
मेरठ मंडल में पिछले वर्ष और वर्तमान का क्षेत्रफल
- पिछले वर्ष 4 लाख 36947 हेक्टेयर क्षेत्रफल रहा।
- इस वर्ष 4 लाख 46 हजार 311 हेेक्टेयर क्षेत्रफल है।
मंडल में गेहूं का जिलेवार क्षेत्रफल और लक्ष्य
जनपद क्षेत्रफल लक्ष्य
मेरठ 77570 76335
बागपत 54690 54019
गजियाबाद 28272 28115
गौतमबुद्धनगर- 44825 44208
हापुड़ 43657 42412
बुलंदशहर 197295 195972
यह लग जाती हैं बीमारी
बढ़ते तापमान के बीच गेहूं की फसल में अल्टनेरिया, सीफ ब्लाइट, स्पोकाइटा, लीफ स्पोट, ब्लैक हेड, ब्लैक प्वाइंट, कॉमन रूफ रोड, पॉल्ड्री मिल्ड्रयू, डाउनी मिल्ड्रयू क्राउन सेट आदि बीमारी आ जाती है।
यह होना चाहिए तापमान
फरवरी में दिन का तापमान 19 से 23, रात का 7 से 10 डिग्री तक होना चाहिए।
मार्च में दिन का तापमान 24 से 28, रात का 10 से 12 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
अप्रैल में दिन का तापमान 30 से 34, न्यूनतम 13 से 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
सर्दी में बारिश न होने का है असर
इस बार विंटर रेन की कमी रही। इस कारण मौसम समय से पहले ही गर्म रहा है। इस बार जनवरी, फरवरी और मार्च से गर्मी असर दिखा रही है। आईआईएफएसआर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन सुभाष का कहना है कि सर्दी में बारिश होना बहुत जरूरी है जो इस बार नहीं हुई है।
30 डिग्री से कम हो पारा
यूपी में 35 से 45 प्रतिशत तक गेहूॅ की बुवाई देर से होती है। अभी दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे होना चाहिए। मौसम में नमी बनी रहेगी तो तापमान भी सही रहेगा, और गेहूं के लिए वह अच्छा होगा। -डॉ. गया प्रसाद, कुलपति कृषि विवि
खेत में नमी बने रहे
तापमान बढ़ने से गेहूं की हार्वेस्टिंग का समय 5 से 10 दिन कम हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि खेत में नमी रहने दें। नमी बनी रहने से फसल के नुकसान को कम किया जा सकता है। -डॉ. एएस पंवार, निदेशक, आईआईएफएसआर