प्रचार के मामले में भाजपा से कोसों पीछे विपक्षी दल
-चुनाव की घोषणा के 19 दिन बाद भी इंडिया गठबंधन का चुनावी प्रचार पकड़ नहीं पाया रफ्तार
- सपा प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति, दिग्गजों का लखनऊ में डेरा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। देश में 18वीं लोकसभा के लिए होने जा रहे चुनाव का एलान हुए 19 दिन हो चुके हैं। प्रचार में भाजपा के अलावा कोई और दल अब तक नजर नहीं आ रहा है। पहले चरण में प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिमी यूपी से ही चुनावी रैली का आगाज 31 मार्च को कर चुके हैं। अब 6 अप्रैल को वह सहारनपुर आ रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जयंत सिंह बुधवार को मुजफ्फरनगर में थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जिलों में प्रबुद्ध सम्मेलन कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी जिलों का दौरा कर रहे हैं। रालोद के प्रमुख जयंत चौधरी भी रैलियां कर रहे हैं। जो नहीं नजर आ रहा है वह है विपक्ष। विपक्षी दलों में खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस कब से प्रचार में उतरेंगे, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी भी अब तक किसी के पास नहीं है।
दरअसल, प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन है। सपा 63 और कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पहले और दूसरे चरण के चुनाव में समाजवादी पार्टी 16 और कांग्रेस 2 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस के हिस्से में सहारनपुर और अमरोहा की सीट है। बाकी सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं। पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया भी खत्म हो चुकी है। दूसरे चरण के लिए प्रक्रिया बृहस्पतिवार को खत्म हो जाएगी। विपक्ष के नजरिये से देखा जाए तो अभी तक प्रचार फीका ही है। अखिलेश यादव अभी उम्मीदवार तय करने में मसरूफ हैं। कई उम्मीदवार बदले गए हैं। कुछ बदले जाने हैं। वहीं कांग्रेस सिर्फ दो ही लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में राहुल गांधी-प्रियंका गांधी या कांग्रेस के स्टार प्रचारक दूसरी सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए आएंगे या नहीं, अगर आएंगे तो कब आएंगे? यह अभी तय नहीं हो पाया है।
कब नजर आएंगे राहुल और अखिलेश?
इंतजार इस बात का भी हो रहा है कि प्रचार के लिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव कब साथ में प्रचार के लिए निकलेंगे। पहले चरण के लिए 17 अप्रैल को शाम पांच बजे प्रचार बंद होगा। ऐसे में पहले चरण वाले जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत में इससे पहले ही सभाएं करनी होंगी।
ईद के बाद जोर पकड़ेगा विपक्ष का प्रचार
सूत्रों का कहना है कि इंडिया गठबंधन का प्रचार इसलिए हल्का है क्योंकि रमजान का महीना चल रहा है। शक है कि जनसभा में रोजे की वजह से मुस्लिम नहीं आएंगेे। इससे संख्या कम रही तो सोशल मीडिया पर इसे मुद्दा बनने में देर नहीं लगेगी। ऐसे में विपक्षी दल ईद के बाद अपनी रैलियां प्लान कर रहे हैं।
आकाश और मायावती जल्द उतरेंगे मैदान में
बहुजन समाज पार्टी का भी प्रचार ईद के बाद ही जोर पकड़ेगा। पार्टी की मुखिया मायावती और मायावती के उत्तराधिकारी बनाए गए आकाश आनंद 14 अप्रैल से चुनाव प्रचार में कूदेंगे। मायावती पहले बिजनौर में और फिर सहारनपुर में रैली करेंगी। यानी जब तक विपक्ष पहले राउंड का प्रचार शुरू करेगा, उस वक्त तक भाजपा एक बड़े हिस्से में अपनी बात लोगों तक पहुंचा चुकी होगी।