हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में गुप्त नवरात्रों के पांचवें दिन माता के पांचवें स्वरूप की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई।
सोमवार को प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में माता की पूजा के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने माता की विधिविधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली की मन्नत मांगी। मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष सुदेश कुमार ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा की गई। मां छिन्नमस्ता, मां दुर्गा का एक उग्र रूप है और उन्हें शक्ति व तेजस्विता का प्रतीक माना जाता है।देवी के गले में हड्डियों की माला होती है। गुप्त नवरात्रों में मां छिन्नमस्ता की पूजा का विशेष महत्व है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और शक्ति की प्राप्ति होती है। शांत भाव से इनकी उपासना करने पर यह अपने शांत स्वरूप को प्रकट करती हैं।
धार्मिक शास्त्रों की मान्यतानुसार, मां छिन्नमस्ता की कृपा से व्यक्ति के सभी भय दूर होते हैं और वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होता है। मां छिन्नमस्ता की पूजा करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह भी माना जाता है कि मां छिन्नमस्ता की पूजा करने से व्यक्ति को वाणी सिद्धि प्राप्त होती है। पंडित मोहित शर्मा ने सभी पूजा विधिविधान से संपन्न कराई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर काजल शर्मा, ज्योति शर्मा, मानसी, कृष्ण सैनी, रामपाल सिंह आदि मौजूद रहे।