लावड़। नियम एवं कानून का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस खुद इनकी धज्जियां उड़ा रही है। लावड़ चौकी की बात करें तो कस्बे के मुख्य बाजार में चौकी का स्थानांतरण हुए 27 साल बीत चुके हैं। हालांकि आज तक चौकी ने उक्त भवन का किराया अदा नहीं किया गया। कई बार भवन स्वामियों ने पुलिस अधिकारियों से इसकी शिकायत की परंतु समस्या का समाधान नहीं हो सका है। यही नहीं पुलिस चौकी पर पिछले सात माह का 86 हजार से अधिक का बिजली का बिल बकाया चला आ रहा है ।
27 साल पहले हुआ था स्थानांतरण
कस्बे में रिपोर्टिंग चौकी पूर्व मेें मोहल्ला काजियान एवं मोहल्ला पटायतान के बीच में थी। आज यह जगह पुरानी पुलिस चौकी के नाम से जानी जाती है। पुलिस विभाग ने चौकी को मेन बाजार में लाने की कवायद शुरू की। करीब 27 साल पहले चौकी का स्थानांतरण कस्बे के मुख्य बाजार में सोसायटी के भवन में कर दिया गया। सन 1992 में स्थानांतरण के बाद से ही पुलिस विभाग ने आज तक इस भवन का किराया अदा नहीं किया। यह जमीन लगभग 100 से अधिक लोगों के नाम पर दर्ज है, जिसमें चौकी की जमीन के साथ एक मैदान व कुछ दुकाने हैं। कई बार इन भवन स्वामियों ने पुलिस विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन आज तक भवन का किराया अदा नहीं किया गया। बात किराए की करें तो वर्तमान में कस्बे में इतने बड़े भवन का लगभग 15 हजार रुपये किराया चल रहा है ।
विद्युत निगम का भी 86 हजार से अधिक का बकाया
भवन के किराये के साथ लावड़ चौकी पर विद्युत निगम का भी पिछले सात माह का बिल बकाया चला आ रहा है। विभाग ने लावड़ चौकी का तीन मई 2019 में 43,521 रुपये का बकाया जमा किया था। हालांकि सात माह का चौकी पर 86 हजार 774 रुपये बकाया अभी भी है। आलम यह है कि सात माह का 86 हजार रुपये से अधिक का बकाया होने के बाद भी चौकी का कनेक्शन आज तक नहीं काटा गया। लावड़ चौकी को डेढ़ साल पहले विद्युत निगम के अफसरों के कहने पर कनेक्शन किया गया। इससे पहले यहां बिजली अवैध रूप से इस्तेमाल की जा रही थी।
नहीं दिया किराया
मेरे साथ-साथ इस जमीन के लगभग 100 से अधिक लोग स्वामी हैं। हर साल अलग व्यक्ति इस जमीन से आने वाले किराए की उगाही करता है। किसी भी स्वामी को आज तक कोई किराया नहीं मिला है।-अकबर, भवन स्वामी
लखनऊ से जमा होता है बकाया
चौकी एवं थानों का बिजली बिल लखनऊ से जमा होता रहता है। जैसे ही पुलिस विभाग को फंड मिलता है वह विद्युत निगम का बकाया जमा कर देता है। इस बार काफी बकाया हो चुका है।-विनेश कुमार, एसडीओ सकौती उपखंड