सहारनपुर शहर में कई साल तक रहते रहे बांग्लादेशी नागरिक भाइयों मो. इकबाल और मो. फारुख के मददगारों की तलाश शुरू कर दी गई है। एटीएस के अलावा स्थानीय पुलिस, खुफिया विभाग, नगर निगम, राजस्व से लेकर श्रम विभाग की टीमों को भी मदद के लिए जांच में लगा दिया गया है। ये टीमें गोपनीय स्तर पर फर्जी दस्तावेजों को मुहैया कराने वाले और अवैध प्रवास में सहयोगी बनने वाले लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
अब तक की छानबीन में यह तो सामने आ गया है कि दोनों बांग्लादेशी नागरिकों का परिवार अब कमेला कॉलोनी की जगह जनता रोड स्थित गांव सिंभालकी जुनारदार में रह रहा है। जांच टीमें अब यह पता लगाएंगी कि कमेला कॉलोनी के पते के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन-किन लोगों की कितनी भूमिका रही है।
लेखपाल, पार्षद, पुलिस, एलआईयू तक जांच घेरे में
एटीएस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस प्रकरण की छानबीन में लेखपाल, पार्षद, पुलिस, एलआईयू, फैक्टरी संचालक सहित क्षेत्र के अन्य लोगों की भी जांच की जानी है। इनके सहित ऐसे अन्य सहयोगियों और दलालों की मदद से ही बांग्लादेशी नागरिकों के आधार पहचान के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ ही बाद में बैंकों में खाते तक खोले जा सके। हालांकि मौजूदा पार्षद से लेकर अन्य लोग अभी तक अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते आ रहे हैं।
एसपी सिटी, सहारनपुर विनीत भटनागर ने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी एटीएस ने की और एटीएस टीम ही इसकी अपने स्तर पर विवेचना कर रही है। स्थानीय स्तर पर जो मदद मांगी जा रही है। उसके अनुरूप पड़ताल करवाई जा रही है। उपलब्ध तथ्यों और जांच के आधार पर ही आगे का खुलासा होगा।
- सहारनपुर में उन्हें किसने नौकरी दिलाई और पासपोर्ट, डीएल, वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाने में कौन-कौन उनकी मदद करता रहा।
- यहां किराए का मकान हासिल करने से लेकर अन्य गतिविधियों में उन्हे किसकी मदद मिली।
- एटीएस आरोपी भाइयों से उनके विदेशी संपर्कों को लेकर भी सवाल करेगी। उनसे नकली करेंसी को लेकर भी सवाल किए जाने हैं। यूपी में छिपे होने के पीछे उनकी क्या मंशा थी और उनके संपर्क में और कितने घुसपैठिए यहां रह रहे हैं इसकी भी जानकारी ली जाएगी।
यह भी पढ़ें: मेरठ में फिर बढ़ी कोरोना की रफ्तार, सख्त हुई पुलिस, बिना मास्क मिलने पर काटे चालान