उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) को चंदा देने वालों पर पुलिस की नजर है। गिरफ्तार किए गए पीएफआई के सदस्यों से पुलिस ने कई रसीद बुक बरामद की थीं, जिनसे चंदे के नाम पर मोटी रकम इकट्ठा की जाती थी। पुलिस पता कर रही है कि चंदा उगाही के पीछे इनका मकसद क्या था।
दरअसल, पुलिस ने चांदपुर की पुरानी बास्टा चुंगी के पास से जन्नत कॉलोनी बिजनौर निवासी नासिरुद्दीन उर्फ कारी नासिर, मंडावली थाने के गांव भागूवाला निवासी आरिफ, गांव जटपुरा बोंडा निवासी दिलशाद और गांव सिरधनी बांगर निवासी इदरीश को गिरफ्तार किया। इनके पास से पीएफआई की 15 बुकलेट, 83 छोटे पर्चे और 21 बड़े पैम्फलेट मिले। पीएफआई की 14 रसीद बुक, 50 विजिटिंग कार्ड, 3180 रुपये काटी गई रसीदों की धनराशि बरामद हुई। चारों आरोपियों को पुलिस ने सोमवार को न्यायालय में पेश करके जेल भेज दिया।
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अब पुलिस ने आरोपियों से बरामद चंदा उगाही की रसीद बुकों को लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि चंदा उगाही के नाम पर कोई बड़ा खेल भी हो सकता है। जिन लोगों से चंदा लिया गया, उनसे मालूम किया जा रहा है कि वाकई उन्होंने चंदा दिया या उनके नाम की फर्जी रसीद काटकर फाड़ दी गई। मामले में पुलिस के रडार पर जिले के तमाम लोग हैं। पुलिस के निशाने पर वे लोग भी हैं, जिन्होंने 20 दिसंबर को उपद्रव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उपद्रव में जिन लोगों के नाम रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उनमें भी कई लोग पीएफआई से जुडे़ मिल रहे हैं। पीएफआई के सरगना नासिरुददीन उर्फ कारी नासिर के संपर्क में रहने वालों की भी जांच हो रही है।
एसपी संजीव त्यागी का कहना है कि पीएफआई के नाम पर रसीद काटकर चंदा उगाही करने के संबंध में गहनता से जांच कराई जा रही है। पता किया जा रहा है कि चंदा उगाही के पीछे क्या मकसद था। जिन लोगों ने चंदा दिया, पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी।
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