शहर में दो अप्रैल को हुए उपद्रव में करीब छह हजार आरोपियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हो चुका है। वीडियो फुटेज और फोटो से कई बवालियों को चिह्नित भी किया जा चुका है। लेकिन दावों के विपरीत उपद्रवियों की गिरफ्तारी आसान नहीं होगी। क्योंकि वक्त बीतते ही कई कारणों से पुलिस भी कदम पीछे खींच लेती है।
उपद्रवियों ने जिस तरह से अराजकता, आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर फायरिंग की, उस पर अफसरों ने सख्त रुख अपनाते हुए 700 से अधिक नामजद और करीब साढ़े पांच हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की 13 धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा समेत 150 से ज्यादा आरोपियों को सोमवार और मंगलवार को जेल भेजा। लेकिन फिर कार्रवाई कमजोर पड़नी शुरू हो गई। अफसरों का कहना है कि दबिश दी जा रही हैं। बवाली घर छोड़कर फरार हैं। वहीं, सूत्रों की मानें तो पुलिस के लिए हजारों की संख्या में बवालियों की गिरफ्तारी आसान नहीं होगी।
उस समय भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
24 अप्रैल 2011 को एल ब्लॉक शास्त्रीनगर में उपद्रव हुआ था। उपद्रवियों ने हापुड़ रोड पर दुकानों और वाहनों में आग लगा दी थी। पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए पुलिस चौकी फूंक दी गई थी। पुलिस की तरफ से नौचंदी थाने में करीब 1600 बवालियों के खिलाफ बलवा, तोड़फोड़, आगजनी, जानलेवा हमला, 7 क्रिमनल लॉ एक्ट समेत 13 गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इन बवालियों की पहचान के लिए थानों में लंबे समय तक फोटो भी लगे रहे। लेकिन कई बवालियों की पहचान होने के बाद भी सियासी व अन्य कारणों से पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की। पुलिस अफसरों के अनुसार मई 2013 में मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी।
चेहरे साफ, गांवों में जाकर होगी पहचान
पुलिस अफसरों का कहना है कि बवालियों की वीडियो फुटेज पुलिस के पास हैं। जिनमें तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर अवैध हथियारों से फायरिंग की गई है। गांवों की सूची तैयार होने के बाद बवालियों की गांवों में ही पहचान होगी और गिरफ्तारी होगी।