भारत बंद के दौरान हुए उपद्रव में चर्चित रहा कंकरखेड़ा का शोभापुर गांव दलित गोपीचंद की हत्या के बाद से सहमा-सहमा सा है। सूनी गलियों के बीच गांव दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल से दुखी ग्रामीण यही बोल रहे हैं कि पता नहीं गांव को किसकी नजर लग गई।
अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को इस गांव का दौरा किया। करीब पांच हजार की आबादी वाले शोभापुर के लिए हाइवे से दो रास्ते जाते हैं। टीम जब गांव के अंदर पहुंची तो बाहरी लोगों को ग्रामीण पुलिस या सीआईडी से समझकर चुप्पी साध गए। गांव के माहौल में किस तरह की तल्खी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग एक-दूसरे के घरों के सामने से बेहिचक निकलने में संकोच कर रहे थे।
नहीं लगी पैठ, सूना रहा चौक
गांव के चौक पर प्रत्येक बृहस्पतिवार साप्ताहिक पैठ लगती हैं। कुछ ग्रामीणों के अनुसार पैठ में भीड़ के चलते पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन आज पैठ ही नहीं लगी। ये बात भी ग्रामीणों को काफी अखर रही थी कि एक छोटे से विवाद ने उनके गांव की ये हालत कर दी।
दलित बस्ती बनी छावनी
गांव का दूसरा छोर दलित बहुल है। यहां चारों तरफ पुलिस फोर्स नजर आई। पीएसी के जवान कैंप किए हुए थे। बस्ती के दोनो छोरों पर कड़ी सुरक्षा थी। बुधवार को पुरानी रंजिश का शिकार हुए गोपीचंद के घर के आसपास पुलिस की घेराबंदी थी। दलित बिरादरी के अधिकांश लोग घरों से बाहर बताए गए।
चौकी पर हुई घटना ने बिगाड़ा माहौल
गांव की गली में बाइक सवार एक युवक से बात करने की कोशिश की तो वो पहले झिझका। परिचय देने के बाद बोला कि गांव में अच्छी भली शांति थी। सभी बिरादरी के लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में शामिल होते हैं। आदर सम्मान करते हैं। लेकिन बीते सोमवार को शोभापुर चौकी पर हुई घटना के बाद गांव का माहौल खराब हुआ। इसके बाद गोपीचंद की हत्या होने के बाद भी माहौल भारी हुआ है।
समझदारी से सुधारना होगा माहौल
गांव में आटा चक्की और पशु आहार की दुकान करने वाले वंश गुप्ता ने बताया कि उनके गांव में 20-25 साल पहले दलित और दूसरे पक्ष में विवाद हुआ था। लेकिन अब सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था। सभी बिरादरी के लोग लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। मगर इस घटना के बाद पूरा गांव दुखी है। सब चाहते हैं कि गांव में पहले जैसा मेलजोल हो। इसके लिए सभी को मिल बैठकर प्रयास करने चाहिए। किराना व्यापारी सोनू गुप्ता भी कहते हैं कि सोमवार से ही दुकान पर ग्राहकी कम हो गई है। गांव के इस माहौल को सुधारने के लिए सभी को समझदारी से काम लेना होगा।
पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता था गोपी
इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गोपी बैडमिंटन का सामान बनाने का काम करता था। फिलहाल वह बसपा नेता योगेश वर्मा के साथ अक्सर रहता था। वह पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता था। लेकिन बसपा से उसे टिकट नहीं मिला। जिसके बाद उसने निर्दलीय लड़ने की तैयारी भी की थी, लेकिन बाद में इंकार कर दिया था।
15 अप्रैल तक तैनात रहे फोर्स
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि कंकरखेड़ा में टंकी मोहल्ला, रामनगर व शोभापुर गांव के आसपास के क्षेत्रों में गोपनीय बैठकों में आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही है। 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंती है। अफसरों को चाहिए कि 15 अप्रैल तक गांव में पुलिस फोर्स तैनात रहे। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पुलिस उपद्रव के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजे। वरना माहौल फिर से खराब हो सकता है। वहीं, कुछ ग्रामीणों में इस बात का भी रोष दिखा कि गांव की राजनीति और रंजिश के तहत उपद्रव में फर्जी नामजदगी की जा रही है। पुलिस निर्दोष लोगों को रंजिशन न फंसाए।
बवाल के बाद बढ़ी हाइवे की सुरक्षा
उपद्रव के बाद दिल्ली-देहरादून हाइवे पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि यह सुरक्षा कब तक रहेगी। जानी थानाक्षेत्र में आने वाले बागपत बाईपास पर सोमवार को खूब उपद्रव हुआ था। तीन बसों में आग लगाई गई थी। अक्सर यहां पर पुलिस नजर नहीं आती। लेकिन बृहस्पतिवार को यहां पुलिस बल तैनात था। भोला रोड मोड़ पर भी पीएसी डटी थी। शोभापुर चौकी पर भी आरएएफ और पुलिस फोर्स तैनात थी। बागपत बाईपास से कंकरखेड़ा बाईपास तक जगह-जगह पुलिस फोर्स का पहरा रहा।