ईद पर मस्जिद से नमाज पढ़कर लौटते समय इरशाद और आसिफ पक्ष के लोगों में बच्चों के झगड़े को लेकर कहासुनी के बाद संघर्ष हो गया था। हमले में एक पक्ष से आसिफ पुत्र इरशाद व उसके परिवार के ही इरशाद पुत्र इस्लाम गंभीर रुप से घायल हो गए थे।
पुलिस ने तहरीर मिलने पर दूसरे पक्ष के इरशाद, नौशाद, सुल्तान, राशिद, मोहम्मद कैफ व जाहिद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया था।
पुलिस ने उस वक्त नामजद आरोपी सुल्तान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने शुक्रवार की रात को बाकी नामजद आरोपियों को पकड़ने के लिए मकानों पर दबिश दी थी। दबिश के दौरान आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके थे।
रविवार को नामजद आरोपियों की ओर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिसमें नामजद आरोपी पक्ष के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने दबिश के दौरान धार्मिक ग्रंथ को जमीन पर फेंक दिया।
वीडियो वायरल होने से दूसरे समुदाय के लोगों में रोष व्याप्त हो गया, जबकि जो वीडियो वायरल किया गया है, उसमें किसी पुलिसकर्मी द्वारा धार्मिक ग्रंथ को जमीन पर फेंकते हुए नहीं आ रहा है।
नामजद आरोपियों को पकड़ने लिए पुलिस ने उनके मकानों पर दबिश दी थी। दबिश के दौरान आरोपी अपने मकानों से फरार मिले थे। पुलिस द्वारा किसी भी धार्मिक ग्रंथ से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। आरोपी जेल जाने से बचने के लिए पुलिस पर गलत तरीके से आरोप लगा रहे हैं। -प्रेम प्रकाश शर्मा, थाना प्रभारी, सिखेड़ा।