मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 60 मिनट के भाषण में हर चुनावी पहलू को छूने की कोशिश की। वेस्ट यूपी के सियासी और सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ उन्होंने पूरे प्रदेश के चुनावी अभियान के आगाज के अंदाज में यहां संबोधन किया। इस दौरान वह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मेरठ में हुई रैली के बाद मिली सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति को साधते दिखे। इसके तहत ही उन्होंने सियासी मुद्दों का भी चुनाव किया।
मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत वर्ष-1857 के स्वाधीनता संग्राम का जिक्र करते हुए की। मेरठ में दोबारा आने को अपना सौभाग्य बताया। मेरठ के खेल और बैंड उद्योग का जिक्र करके उन्होंने मतदाताओं को भावनात्मक तौर पर अपने साथ लाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने भाषण के शुरुआती कुछ मिनटों में ही जनता से कहा कि आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया है। उत्तर प्रदेश के विकास को क्रांतिधरा की इज्जत से जोड़कर भी उन्होंने भावनात्मक तौर पर मतदाताओं के मन को टटोलने की कोशिश की। उन्होंने वोटरों को यह बताने की कोशिश की कि केंद्र सरकार उनके विकास के लिए तमाम योजनाएं लाना चाहती है। यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश का कर्ज अभी उन पर बाकी है। वह प्रदेश का और विकास करना चाहते हैं। यहां तक कि सूबे में सत्ता परिवर्तन को उन्होंने उत्तर प्रदेश के भाग्य बदलने से जोड़ दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किया तो भीड़ का जोश देखते ही बना। खराब कानून- व्यवस्था पर उन्होंने खूब प्रहार किया और कई बार कहा कि बहन-बेटियों की सुरक्षा को बहेतर करने के लिए उनकी सरकार जरूरी है।
जवान और किसान से व्यापारियों तक
मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में सेना से जुड़े काफी जवान और उनके परिजन हैं। यही वजह रही कि प्रधानमंत्री ने वन रैंक वन पेंशन का जिक्र भी किया और सर्जिकल स्ट्राइक को अपनी सरकार के गौरव के रूप में प्रस्तुत किया। यहां तक कहा कि वह दीपावली सीमा पर जवानों के साथ बिताते हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम व्यापारियों की चिंता को भी दूर करने की कोशिश की। वेस्ट यूपी में गन्ना बेल्ट को देखते हुए उन्होंने बार-बार गन्ना किसानों के हित की बात कही। यह वादा भी दोहराया कि प्रदेश में उनकी सरकार आने पर गन्ना भुगतान बेहतर तरीके से होगा। लोकसभा चुनाव में किए गए अपने वादों का भी उन्होंने जिक्र किया। दरअसल, वेस्ट यूपी में गन्ना भुगतान एक अहम मुद्दा है। इसके जरिये यहां की किसान बिरादरी को साधने की कोशिश की। उन्होंने भाजपा की सरकार आने पर किसानों की समस्याओं को खत्म करने का वादा कर बड़े वोट बैंक को अपने पाले में लाने का प्रयास किया।
2014 से आगे की लकीर की कोशिश
मेरठ में दो फरवरी 2014 को इसी मैदान में लोकसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा की रैली हुई थी। उस समय पीएम पद के दावेदार मोदी ने भी पहले स्वाधीनता संग्राम से जोड़कर अपने भाषण की शुरुआत की थी। अब लगभग ढाई साल बाद मोदी जब उसी मैदान पर आए तो उन्होंने अपनी पिछली रैली का भी जिक्र किया। दरअसल, मोदी की लोकसभा चुनावों के दौरान हुई रैली के बाद भाजपा को पश्चिम में भारी सफलता मिली थी। पहले चरण के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में चली लहर पूरे प्रदेश में चली थी। भाजपा उसी को फिर से दोहराना चाहती है। यही वजह है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने जनता से फिर से उसी अंदाज में वोट करने की अपील की। मोदी ने युवाओं से सीधे संवाद के अंदाज में भाषण दिया।
रणनीति के तहत प्रतिद्वंद्वियों का चयन
पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान चौधरी अजित सिंह और रालोद का एक बार भी नाम नहीं लिया। स्कैम शब्द के तहत उन्होंने मायावती का नाम लिया और नोटबंदी के जिक्र में अप्रत्यक्ष तौर पर कटाक्ष करने के अलावा मायावती का ज्यादा जिक्र उन्होंने नहीं किया। दरअसल, यह भाजपा की रणनीति भी हो सकती है। वेस्ट यूपी में बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण अहम है। संभव है कि वेस्ट यूपी में बसपा को मुख्य प्रतिद्वंद्वी न मानकर भाजपा अपने खिलाफ दूसरे दलों को एकजुट होने से बचना चाहती हो। यहां की किसान बेल्ट में चौ. चरण सिंह का नाम न लेना भी अहम रहा। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरे में भी उन्होंने चौ. चरण सिंह को अहम स्थान दिया था।
मोदी के मंच पर इनकी मौजूदगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल, बागपत सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह, बिजनौर सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह, विधायक ठा. संगीत सोम, विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक रविंद्र भड़ाना, मुजफ्फरनगर विधायक कपिल अग्रवाल, मेयर हरिकांत अहलूवालिया, प्रदेश उपाध्यक्ष अश्वनी त्यागी, कांता कर्दम, किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयपाल तोमर, क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, जिलाध्यक्ष शिव कुमार राणा, मेरठ से दक्षिण सीट प्रत्याशी डॉ. सोमेंद्र तोमर, किठौर के सत्यवीर त्यागी, हस्तिनापुर के दिनेश खटीक, सिवालखास के जितेंद्र सिंह सतवाई के अलावा बागपत जिले के प्रत्याशी योगेश धामा, केपी मलिक, सतेंद्र तुगाना, मुजफ्फरनगर के अवतार सिंह भड़ाना, विजय कश्यप, उमेश मलिक, विक्रम सैनी, प्रमोद उंटवाल समेत मोदीनगर प्रत्याशी मंजू सिवाच मौजूद रहीं।
अवतार भड़ाना ने भेंट की शाल
मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से भाजपा प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना ने शॉल ओढ़ाकर पीएम का सम्मान किया। जैसे ही नरेंद्र मोदी ने अपना संबोधन पूरा किया और जाने के लिए मुड़े। अवतार सिंह भड़ाना आगे आए और उन्होंने मोदी को शॉल ओढ़ाया।
शारदा, अग्रवाल के विवादित बोल
कैंट प्रत्याशी सत्यप्रकाश अग्रवाल और भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा विवादित बयान दे गए। दोनों नेताओं को मोदी के आने से पहले बोलने का मौका दिया गया था। सत्यप्रकाश अग्रवाल ने जहां हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगे। वहीं विनीत अग्रवाल शारदा ने एक कदम आगे बढ़ते हुए अप्रत्यक्ष रूप से एक समुदाय से सावधान रहने की हिदायत दे डाली।
अपने प्रत्याशी का नाम आते ही नारेबाजी
प्रधानमंत्री ने संबोधन शुरू करते हुए जब मंच पर बैठे लोगों के नाम लेने शुरू किए तो कई प्रत्याशियों के समर्थकों ने अपने प्रत्याशी का नाम आते ही नारेबाजी की। जैसे ही मोदी ने सरधना विधायक संगीत सोम का नाम लिया, उनके समर्थकों ने उत्साह के साथ नारेबाजी की। इसके बाद डॉ. सोमेंद्र तोमर, सत्यवीर त्यागी, दिनेश खटीक और जितेंद्र सिंह सतवाई के समर्थकों ने भी नारेबाजी की।
सोशल मीडिया पर छाया ‘स्कैम’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्कैम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में स्कैम चाहते हैं या भाजपा की भ्रष्टाचार मुक्त सरकार। स्कैम शब्द का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि एस से सपा, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश और एम से मायावती। उन्होंने कहा कि स्कैम से यूपी को मुक्त कराना है। यह स्कैम मोदी के संबोधन के बाद ही सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। लोगों ने स्कैम लिखकर उसके एक-एक अक्षर को परिभाषित कर फेसबुक के साथ व्हाट्सएप पर भी वायरल किया।
निशाने पर रहा सपा परिवार
मोदी ने सपा पर सबसे ज्यादा तंज कसे। खासतौर पर परिवारवाद पर निशाना साधा। कहा कि इस दल में कभी चाचा तो कभी भतीजा, कभी भतीजे की बहू तो कभी कोई और, बस यही पूरा परिवार है। सब जानते हैं कि इन लोगों ने यूपी का क्या हाल किया है? इसके अलावा कांग्रेस पर निशाना साधा। मायावती को भी कठघरे में खड़ा किया पर सबसे ज्यादा टारगेट पर सपा ही रही।
सुरक्षा ऐसी कि पानी को भी तरसे
रैली में सुरक्षा व्यवस्था ऐसी रही कि आगे बैठे लोग पानी के लिए भी तरस गए। एसपीजी के निर्देश का हवाला देते हुए सुरक्षाकर्मियों ने पानी की बोतल तक नहीं ले जाने दी। ऐसे में मीडिया के साथ वीवीआईपी गैलरी में बैठे लोगों को पानी नहीं मिल सका।
एलईडी पर देखा मोदी का भाषण
रैली स्थल पर आगे की तरफ मौजूद युवाओं की भीड़ इस कदर बेकाबू थी कि कुर्सियों और बैरिकेडिंग पर खड़े होकर नारेबाजी करती रही। ऐसे में पीछे बैठे लोगों ने मैदान में लगे आधा दर्जन एलईडी स्क्रीन पर प्रधानमंत्री का भाषण सुना।
महिलाओं की रही खासी भागीदारी
रैली में युवा जहां सबसे ज्यादा रहे तो महिलाओं की भी अच्छी संख्या रही। महिलाओं के लिए मंच की दायीं तरफ बैठने की व्यवस्था थी, जबकि बायीं तरफ वीवीआईपी गैलरी थी। रैली में शहर से ज्यादा देहात क्षेत्र की महिलाएं ज्यादा नजर आईं।
पुलिस, भाजपाइयों ने संभाली कमान
रैली में व्यवस्था बनाने के लिए जहां चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात थी तो उनके समानांतर भाजपा कार्यकर्ता भी मुस्तैद रहे। रैली में आने वाले किसी भी व्यक्ति से अनावश्यक पूछताछ या रोकटोक पर भाजपा कार्यकर्ता तुरंत बीच में आकर लोगों को आगे बढ़ा देते थे। मंच से भी लगातार संचालक सुरक्षाकर्मियों को अनावश्यक रोक-टोक न करने के निर्देश देते रहे।
मंच और हेलीपैड की दिशा बदली
शनिवार को मोदी की मेरठ में दूसरी रैली थी। इससे पहले वह 2 फरवरी 2014 को लोकसभा चुनाव से पूर्व आए थे। तब जिस दिशा में रैली का मंच था, इस बार उसके विपरीत बनाया गया। पहले हेलीपैड माधवकुंज के बराबर में बना था तो इस बार विपरीत दिशा में अध्ययन स्कूल के पास।
बाढ़ का होगा स्थायी समाधान
मोदी के आने से पहले हस्तिनापुर प्रत्याशी दिनेश खटीक को भाषण देने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में हजारों किसान परिवार रहते हैं। जिनकी फसल हर साल गंगा में आने वाली बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो जाती है और भारी नुकसान होता है। भाजपा की सरकार आने पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नुकसान कम से कम हो, इसके लिए स्थायी समाधान कराया जाएगा। उन्होंने हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की भी बात रैली में कही।
मतदान की तारीख भूल बैठे केशव
संबोधन के दौरान जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने मतदान की अपील की तो उन्होंने कहा कि 13 फरवरी को भारी संख्या में वोट देना। पीछे बैठे सरधना विधायक संगीत सोम ने उन्हें याद दिलाया कि 13 नहीं, 11 फरवरी है। इस पर सुधार करते हुए उन्होंने 11 फरवरी को मतदान की अपील की। उनकी इस भूल पर मंच पर बैठे पीएम जहां हंसते नजर आए तो जब मौर्य उनके पास जाकर बैठे तो उन्होंने उनकी चुटकी भी ली।
स्वागत के साथ दिया परिचय
हेलीपैड पर पीएम नरेंद्र मोदी का केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विनीत अग्रवाल शारदा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अरुण वशिष्ठ, विमल शर्मा, जितेंद्र वर्मा, महानगर उपाध्यक्ष ललित नागदेव, पं. सुनील भराला, विवेक रस्तोगी, कमल दत्त शर्मा, संजय त्रिपाठी, हरीश चौधरी, धर्मेंद्र भारद्वाज, वीर सिंह कर्दम, संदीप प्रधान, हरेंद्र काकरान, सुरेश जैन रितुराज, पूर्व विधायक गोपाल काली, विनोद हरित, अतुल खटीक, दीपक खुराना ने स्वागत किया। इस दौरान पंक्ति में खड़े सभी नेताओं ने प्रधानमंत्री से हाथ मिलाते हुए अपना परिचय दिया।
सबसे बाद में छेड़ा नोटबंदी का तराना
अपने एक घंटे भाषण में मोदी ने सबसे आखिर में नोटबंदी प्रकरण का जिक्र किया। अंदाजा तो यह लगाया जा रहा था कि शायद मोदी शुरू में ही इस फैसले का जिक्र करेंगे पर सबसे आखिर में इसका जिक्र हुआ। मोदी ने माइक संभाला तो एक के बाद एक निशाने साधे। एक घंटा अनवरत बोलते रहे। बीच बीच में पानी की घूंट लेते रहे। अंदाज पुराना रहा। हाथ हिलाकर, मुट्ठी बांधकर, दोनों हाथ हवा में लहराकर, चेहरे पर कभी गुस्सा तो कभी व्यंग्य भाव लाकर लोगों को साधने की पूरी कोशिश की। जब आधे से ज्यादा भाषण समाप्त हो गया तब तक भी नोट बंदी और सर्जिकल स्ट्राइक का कोई जिक्र मोदी ने नहीं किया। लोगों को लगने लगा कि शायद ही अब इन मुद्दों पर बात हो लेकिन भाषण के आखिरी दौर में उन्होंने पहले सर्जिकल स्ट्राइक पर बात की। बताया कि इस बारे में पहले फौज से बात की और फिर इस काम को बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया गया। इसके बाद नंबर आया नोटबंदी का। कहा कि आठ नवंबर को रात आठ बजे ऐसा हुआ कि सत्तर साल में जमा किया गया माल बैंकों में जमा करना ही पड़ा। यहां उन्होंने यह साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार, कालाधन आदि पर वह काम करते रहेंगे। साफ कहा कि मोदी अब रुकने वाला नहीं है।
जो अपने बाप का नहीं हुआ, आपका क्या होगा : केशव
विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जो अपने बाप का नहीं हो सकता, वह आपका क्या होगा? साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी पैसा लेकर पूंजीपतियों को टिकट देने का आरोप लगाया।
मौर्य ने कहा कि जो मुख्यमंत्री होते हुए, पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होते हुए अपनी ही पार्टी का कार्यालय जबरन कब्जा सकता है, यदि वह दोबारा सत्ता में आया तो क्या आम लोगों का मकान, दुकान बचेगी? कहा कि सपा सरकार का हाल यह है कि मथुरा में जमीन पर कब्जे हुए। कब्जामुक्त कराने गए एसपी और थानेदार की सरेआम हत्या हो गई। ऐसे में कानून-व्यवस्था का क्या हाल है, अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बोले कि इस बार साइकिल को पंक्चर कर ही दो। मायावती कानून-व्यवस्था की बात करती हैं पर मुख्तार अंसारी जैसे व्यक्ति को टिकट देती हैं। कहा कि वह बताएं कि उन्होंने कितने पूंजीपतियों से पैसे लेकर टिकट बांटे। वह भ्रष्टाचार की साक्षात प्रतिमा हैं। बोले कि जनता अब नारे लगा रही है, अखिलेश राहुल तुम संघर्ष करो, हम मोदी के साथ हैं। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा यूपी की सत्ता में आई तो किसानों के फसल कर्ज माफ होंगे। नौकरियों में इंटरब्यू खत्म होगा।