- दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन जैन मंदिरों में हुए विशेष धार्मिक अनुष्ठान
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की गई। मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, विधान, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बताया गया कि उत्तम आर्जव धर्म सरलता का प्रतीक है। कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने सरल जीवन जीने का संकल्प लिया।
कालिंदी स्थित चंदप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में नित्य नियम पूजा के साथ सोलह कारण, पंच मेरु और उत्तम आर्जव धर्म की पूजा संपन्न हुई। समवशरण विधान का भी आयोजन किया गया। इसमें विद्या जैन, नीलम जैन, नीतू जैन, सुनीता जैन, ममता जैन, रिद्धि जैन सहित कई महिलाएं उपस्थित रहीं। मंदिर में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा और श्रद्धालुओं ने विधान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और होता है मायाचारी : कंचन जैन
मेरठ। कचहरी रोड स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक और पूजन हुआ। विकास जैन, विपिन जैन, अनिल जैन, शोभित जैन सहित अन्य उपस्थित रहे। कंचन जैन ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरलता भगवान के द्वार में प्रवेश का साधन है। उन्होंने मायाचारी को बगुले के समान बताया। जो बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और होता है। मायाचारी विश्वासघात का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आर्जव धर्म मन, वचन और काया की सरलता को अपनाने का संदेश देता है। शाम को मंदिर में दीप अर्चना और आरती के साथ एक सुंदर म्यूजिकल खेल धर्म की चकरी पालकी का आयोजन किया गया। प्रतीक जैन और सौम्या जैन ने संगीतमय धुनों के साथ बच्चों को धर्म का ज्ञान दिया। इस दौरान भक्ति नृत्य भी युवती संघ द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में कंचन जैन, राजीव जैन, अंजू जैन, बबिता जैन, पूनम जैन, प्रशांत जैन, विकास जैन आदि का सहयोग रहा। ब्यूरो
मुनि सुब्रतनाथ विधान में अर्घ्य अर्पित किए
मेरठ। असौड़ा हाउस स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में अभिषेक और शांतिधारा हुई। स्वर्ण झारी से शांति धारा का सौभाग्य कमल जैन, नवीन जैन और अर्पित जैन परिवार को प्राप्त हुआ। रजत झारी से शांतिधारा पंकज जैन, नवीन जैन, शुभम जैन, अनमोल जैन और अमित जैन परिवार ने की। मुनि सुब्रतनाथ विधान किया गया। श्रद्धालुओं ने मांडले पर अर्घ्य समर्पित किए। पंडित सिद्धांत शास्त्री ने उत्तम आर्जव धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि सरलता ही आर्जव का सार है। दिगंबर मुनि और बालक का हृदय सरल होता है। सरल हृदय में सत्य और विश्वास का वास होता है। उन्होंने कहा कि सरलता समाज के लिए दर्पण की तरह है जो बिखरे मोतियों को एक सूत्र में पिरोती है। रात्रि में भक्ति नृत्य और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। इसमें 25 बच्चों ने हिस्सा लिया और सभी को पुरस्कृत किया गया। मंदिर परिसर में विनोद जैन, मनोज जैन, कपिल जैन, संजय जैन, रमेश जैन, सुरेश जैन रहे। ब्यूरो
आत्मा का स्वभाव है सरलता
मेरठ। आनंदपुरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व के तीसरे दिन भगवान मुनि सुब्रतनाथ को पांडुक शिला पर विराजमान कर अभिषेक और शांतिधारा की गई। शांतिधारा का सौभाग्य गंधर्व जैन, अनुराग जैन, अरुण जैन, अनव जैन, तरस जैन, और तरुण जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद देव शास्त्र गुरु, भगवान अजीतनाथ, भगवान संभवनाथ और मुनि सुब्रतनाथ की पूजा की गई। अर्हम चक्र महामंडल विधान में 65 अर्घ्य समर्पित किए गए। पंडित नंदन शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि सरलता आत्मा का स्वभाव है और कुटिलता से बचना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर उमेश जैन, सुनील जैन, अचल जैन, अभिषेक जैन, अरुण जैन, सत्येंद्र जैन, चैतन्य जैन, और अंकुर जैन रहे।
- शांतिनाथ भगवान की हुई पूजा
मेरठ। वीर नगर में दसलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा हुई। भगवान आदिनाथ का अभिषेक और पूजा अर्चना संपन्न हुई। शांतिधारा का सौभाग्य सतीश जैन, मोहन जैन, और प्रमोद जैन परिवार को प्राप्त हुआ। सांध्यकाल में आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक तंबोला हुआ। सुषमा जैन और रुक्मिणी जैन ने सभी को उपहार दिए। इस अवसर पर अमित जैन, वीरेंद्र जैन, नितिन जैन, संदीप जैन, और रविंद्र जैन रहे। ब्यूरो
- स्वयं ही संकट में रहता है मायाचारी
मेरठ। शारदा रोड स्थित महावीर जयंती भवन में पंडित जय कुमार जैन ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि मायाचारी और कसाय से मुक्त होकर ही सरलता प्राप्त की जा सकती है। मायाचारी व्यक्ति का कोई विश्वास नहीं करता। वह स्वयं भी संकट में रहता है। प्रथम अभिषेक सौधर्म इंद्र उमेश जैन द्वारा और शांतिधारा दीपांशु जैन और ऋषभ जैन सराफ द्वारा की गई। अनिल जैन, संजय जैन, विनोद जैन, देवेंद्र जैन, सौरभ जैन, पंकज जैन आदि रहे।
फूलबाग कॉलोनी में श्री आदिनाथ मंदिर में अभिषेक के बाद आरके जैन ने मुख्य शांतिधारा और मोहित जैन ने सिद्ध प्रभु की शांतिधारा का विधान कराया। नवीन जैन ने बताया कि आर्जव धर्म मन की सरलता को दर्शाता है। मायाचारी व्यवहार को त्यागकर ही इसे धारण किया जा सकता है। सांध्यकाल में सामूहिक आरती, शास्त्र सभा और जैन मिलन महिला ज्योति द्वारा आओ ज्ञान बढ़ाए कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। नवीन, हेमंत, संजय, प्रदीप, रवि, योगेंद्र, विनय, संजीव, वीरेश, मयंक रहे। वसुनंदी विहार में विधानाचार्य सौरभ शास्त्री के सान्निध्य में दसलक्षण विधान संपन्न हुआ। प्रथम अभिषेक जिवेंद्र जैन और शांतिधारा अनिल जैन को करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सौरभ ने बताया कि उत्तम आर्जव धर्म आचरण में सरलता का प्रतीक है। मंदिर समिति ने कलकत्ता से पधारीं आईएएस अहिंसा जैन का अभिनंदन किया। संजय जैन, संयम जैन, राजीव जैन, संगीता जैन, इंदु जैन, कविता जैन रहीं।
शास्त्रीनगर जैन मंदिर में विधानाचार्य पीयूष जैन शास्त्री और बाहुबली जैन शास्त्री के सान्निध्य में शांतिधारा प्रवीण जैन, अभिषेक जैन, और अरहम जैन ने की। सांध्यकाल में आरती, प्रवचन और प्रश्न मंच का आयोजन हुआ। इसमें पीयूष शास्त्री ने ज्ञानमय वातावरण बनाया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिला समिति ने योगदान दिया। सुधीर कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, शशि भूषण जैन, राजीव जैन, सौरभ जैन, नीरज रानी जैन रहीं। अरुणम कॉलोनी स्थित महावीर मंदिर में भगवान का जलाभिषेक और शांति धारा के बाद देव शास्त्र गुरु, मुनि सुब्रतनाथ, पंच मेरु, और दसलक्षण धर्म की पूजा हुई। पूजा का सौभाग्य अनमोल जैन (धूपबत्ती वाले) और शांति धारा का सौभाग्य अक्षय जैन को प्राप्त हुआ। प्रतीक जैन, प्रवीण जैन, मुकुल जैन, मुकेश जैन, और विशाल जैन ने सहयोग किया।
इसके अलावाा थापरनगर में आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मुनि सुवर्तनाथ भगवान को स्वर्ण पांडुक शिला पर विराजमान किया गया। भगवान की पूजा से सभी दोषों का निवारण होता है। अभिषेका का सौभाग्य रमाकांत जैन, योगेंद्र जैन, विशाल जैन, अतुज जैन परिवार को मिला। मंदिर जी में तत्वार्थ सूत्र विधान हुआ। उत्तम आर्जव का महत्व बतायगिया। इस अवसर पर दिनेश चंद्र जेन, संजय जैन, अजय जैन, अंकुर जैन रहे।
मेरठ..कंवलजीत..दसलक्षण पर्व पर दिगंबर जैन पंचायती मंदिर थापर नगर में पूजन करते जैन समाज के लोग