कोरोना से जंग के लिए तैयार हैं हर वर्ग के लोग
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस की जानलेवा और वैश्विक बीमारी के खिलाफ जंग ने सहानरपुर जिले की जनता को कमजोर करने की बजाय इनके जज्बे को और मजबूत कर दिया है। यही वजह है कि जनता कर्फ्यू के दौरान यहां के सभी वर्ग के लोगों ने दिखा दिया है कि ये जंग न तो हिंदू की है न मुस्लिम की, न सिख की और न ईसाई की। ये तो हर वर्ग, हर भाई और इंसानियत के लिए जंग है। इस लड़ाई में पान का खोखा चलाने वाले गरीब से लेकर बड़े उद्योगपति सहित अन्य लोग भी एक साथ हैं।
जनता कर्फ्यू के दौरान बच्चे से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक ने जिस तरह बीमारी से मुकाबले में एकजुटता और इससे निपटने का हौसला दिखाया। वह कमाल का रहा। स्वेच्छा से कर्फ्यू होने के बावजूद न तो किसी लाठी डंडे की जरूरत पड़ी और न ही बहुत बड़ी फोर्स की। ये हालात भी ऐसे जिले के रहे जिसने हिंदू-मुस्लिम से लेकर जातीय मतभेदों के कारण दंगे, बवाल और विरोध प्रदर्शन तक झेले हैं। मौजूदा समय में भी सीएए, एनपीआर, एनआरसी जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रति भारी गुस्सा लोगों में देखने को मिला। देवबंद में भी लगातार धरना जारी रहा। इन सबके बावजूद जब बात कोरोना वायरस जैसी बीमारी से मुकाबले की आई तो सारे भेद भुलाकर लोग अपने मुल्क के साथ खड़े हो गए हैं।
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शाम को उठी थाली, ताली और शंख की ध्वनि ने ऐसा कंपन पैदा किया कि कोरोना की जंग से वाकई आरपार की लड़ाई का एलान हो चुका है। यह अद्भुत, अकल्पनीय माहौल रोमांचित करने वाला रहा। शहर से लेकर गांव तक दिल खोलकर समर्थन को गंगा-जमुनी तहजीब ने यादगार बना दिया। यही, वजह रही कि कहीं जनता कर्फ्यू को लेकर पुलिस को सख्ती नहीं बरतनी पड़ी। कुछ जगह कुछ लोग खाकी से उलझे पर जल्द ही समझ भी गए। दो जून की रोटी अपने परिवार के लिए दिहाड़ी पर कमाकर पेट पालने वालों ने भी इसमें साथ दिया। करोड़पति हो या खाकपति जंग में साथ सबका मिला।
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