खबर गाजियाबाद- बुलंदशहर के लिए ध्यानार्थ
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बुलंदशहर में चल रहा था यूरिया खाद की कालाबाजारी का गोरखधंधा
इस मामले में कई के खिलाफ हो चुकी है रिपोर्ट दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बुलंदशहर में यूरिया खाद की कालाबाजारी का भंडाफोड़ होने के बाद जांच में फंसे पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक वैभव कुमार के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है। जांच टीम ने इनको प्रथम दृष्टया दोषी माना है। आरोप है कि ये एक गैंग के साथ मिलकर यूरिया खाद की कालाबाजारी में लिप्त थे। फिलहाल इनको पीसीएफ अलीगढ़ के क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। निलंबन के दौरान इनको आधा वेतन दिया जाएगा।
बता दें कि बुलंदशहर के जिला कृषि अधिकारी ने 10 मई को 2026 को अनूपशहर तहसील क्षेत्र में गंगापुल के निकट इफको यूरिया से लदे तीन ट्रकों को पकड़ा था। जिनमें 525 बैग यानी कुल 23.625 मीट्रिक टन प्रति ट्रक यूरिया लदा था। इस प्रकार कुल 1575 बैग में लगभग 70.875 मीट्रिक टन यूरिया की बरामदगी हुई। उस समय पाया गया था कि उर्वरक का कालाबाजारी के उद्देश्य से अवैध परिवहन किया जा रहा था। गिरफ्तार उर्वरक तस्कर मोहम्मद हारून ने स्वीकार किया था कि उर्वरक का मूल्य लगभग 5.50 लाख है। जिसमें 4.50 लाख नकद और एक लाख रुपये क्यूआर कोड के माध्यम से बुलंदशहर में तैनात पीसीएफ के कार्मिकों को भुगतान किया गया। उर्वरक की कालाबाजारी एवं उर्वरकों के अवैध कार्य में पीसीएफ गोदाम से लोडिंग के समय संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति की भी बात कही थी। जिला कृषि अधिकारी ने थाना अनूपशहर में आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा-3/7 के अंतर्गत ट्रक चालक मोहम्मद हारून, पीसीएफ बुलंदशहर के जिला प्रबंधक, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक/ भंडार नायक एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लि. के प्रबंध निदेशक डॉ. चंद्रभूषण का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। पीसीएफ मेरठ मंडल के प्रबंधक क्षेत्रीय प्रबंधक एवं उप महाप्रबंधक सामान्य वैभव कुमार की भूमिका की प्रारंभिक जांच कराने के लिए अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक, सहकारिता मेरठ मंडल को नियुक्त किया गया था। अब उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में बुलंदशहर में उर्वरक कालाबाजारी के प्रकरण में वैभव कुमार को सहयोगी मानते हुए जांच रिपोर्ट जारी कर दी है। जिसके आधार पर इनको निलंबित कर दिया गया है। इन्होंने बताया कि इनको मदों का भुगतान तभी किया जाएगा, जब वैभव कुमार इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार-वृत्ति व्यवसाय में नहीं लगे हैं। इस प्रकरण की जांच के लिए कार्यकारी निदेशक-वित्त, पीसीएफ मुख्यालय को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।