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झांसी, अमरोहा की मिल के कारण रुका मेरठ कताई मिल का हस्तांतरण

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परतापुर कताई मिल के विकास में बाधा बनी झांसी, अमरोहा की मिल
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मेरठ। परतापुर कताई मिल पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने की राह में झांसी और अमरोहा की कताई मिल बाधा बन गई हैं। शासन तीनों को एक साथ ही हस्तांतरित करने की प्रक्रिया करेगा। परतापुर कताई मिल पर अन्य दोनों मिलों से काफी कम देनदारी होने के बाद भी पहले इसे हस्तांतरित नहीं किया जा रहा है।
प्रदेश में झांसी, अमरोहा और मेरठ में सालों से बंद पड़ी कताई मिलों को सूत निगम से यूपीएसआईडीसी को हस्तांतरित होना तय हुआ है। यूपीएसआईडीसी कताई मिलों की जमीनों पर औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करेगा। शासन स्तर पर कताई मिलों की संपत्तियों व जमीनों का मूल्यांकन हो चुका है। देनदारियों की गणना भी हो चुकी है, लेकिन शासन के पास बजट की कमी के कारण बैंकों का कर्ज भुगतान नहीं हो पा रहा। इस कारण मिलों के हस्तांतरण की प्रक्रिया रुकी हुई है।
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तीनों मिलों में मेरठ परतापुर कताई मिल ऐसी मिल है जिस पर औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी। मिल की जमीन का लैंडयूज पहले से ही औद्योगिक क्षेत्र में हैं। इसलिए लैंडयूज परिवर्तित नहीं करना पड़ेगा। जबकि अन्य जिलों की मिलों का लैंडयूज भी बदलेगा। वहीं तीनों कताई मिलों में सबसे कम देनदारी परतापुर कताई मिल की है। जिसका भुगतान बैंक को होना है। कम बकाया और समान लैंडयूज के बाद भी परतापुर कताई मिल का हस्तांतरण एक साथ प्रक्रिया होने के कारण फंसा हुआ है। यूपीएसआईडीसी द्वारा शासन की बैठक में परतापुर कताई मिल की प्रक्रिया पहले कराने की अपील खारिज हो चुकी है।
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