लगभग 15 वर्ष पूर्व उन्होंने खेलना शुरू किया था। गांव की पगडंडियों पर खेलते और गन्ने को भाला बनाकर प्रैक्टिस करने वाली अन्नू एक दिन देश-विदेश में होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा, लेकिन अपने संघर्ष और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने ये कर दिखाया। अन्नू रानी तीन बहन व दो भाइयों में सबसे छोटी हैं।
उनके सबसे बड़े भाई उपेंद्र कुमार भी 5,000 मीटर के धावक थे और विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी ले चुके हैं। बड़े भाई के साथ अन्नू रानी ने भी खेल में रुचि दिखाई और सुबह चार बजे उठकर गांव में ही रास्तों पर दौड़ने जाया करतीं। बचपन में परिवार के साथ खेले जा रहे क्रिकेट मैच में जब काफी दूर से उन्होंने बॉल को आसानी से फेंका तो उनके भाई ने उनकी बाजुओं की ताक़त को पहचाना। उन्होंने एक गन्ने को भाले की शक्ल देते हुए उसे अन्नू के हाथों में पकड़ा दिया।
स्वामी विवेकानंद का रहा विशेष योगदान, वहीं से मिले पहले जूते
अन्नू की खेल में रुचि बढ़ी, तो भाई उपेंद्र कुमार ने उन्हें गुरुकुल प्रभात आश्रम का रास्ता दिखाया। घर से करीब 20 किलोमीटर दूर होने के कारण अन्नू जेवलिन थ्रो का अभ्यास करने के लिए सप्ताह में तीन दिन गुरुकुल प्रभात आश्रम के मैदान में जाती थीं। अन्नू के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि दो खिलाड़ियों पर होने वाले खर्चे को वहन कर सकें, इसे देखकर भाई उपेंद्र ने त्याग किया और बहन को आगे बढ़ाने में जुट गए।
उपेंद्र ने बताया कि अन्नू के पास जूते नहीं थे। आश्रम के गुरुजी स्वामी विवेकानंद ने लोगों ने अन्नू को आगे बढ़ाने के लिए कहा। वहां से आए चंदे से इकट्ठा की गई रकम से उसके लिए जूते खरीदे गए। अन्नू ने अपना अभ्यास जारी रखा और जेवलिन थ्रो में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर वह नेशनल चैंपियन बन गईं। इसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उन्होंने खुद ही 9 बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने पूर्व भारतीय खिलाड़ी काशीनाथ नाइक से प्रशिक्षण लिया। अब साईं की ओर से उन्हें विदेशी कोच के द्वारा तैयारी कराई जाती है।
अन्नू की उपलब्धियां:
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ पदर्शन- 2022 में जमशेदपुर में होने वाली इंडियन ओपन जेवलिन थ्रो में 63.82 मीटर दूरी तय की
2023- एशियन गेम्स में 62.92 मीटर दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता
2021 - टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग।
2022- बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक
2019 - वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला का रिकॉर्ड।
2019 - एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक।
2017 - एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
2016 - साउथ एशियन गेम्स में रजत पदक।
2014 - एशियन गेम्स में कांस्य पदक।