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पप्पू पेजर और डॉली ने किया दीवाना

Fri, 21 Aug 2015 02:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
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फिल्म ‘हम किसी से कम नहीं’ के पप्पू पेजर यानि सतीश कौशिक को भूलना दर्शकों के लिए मुश्किल है। पप्पू पेजर मेरठ को भूल जाएं ये मुमकिन नहीं है, क्योंकि इन्हें यहां की मेहमान नवाजी और रेवड़ी-गजक बहुत पसंद है। यहां के हुनर के तो ये दीवाने हैं।
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रामलखन, तेरे नाम, साजन चले ससुराल जैसी दर्जनों मशहूर फिल्मों के ये निर्माता, निर्देशक रहे हैं। कई फिल्मों में तो इन्हें हास्य कलाकार की भूमिका भी निभाई है। बृहस्पतिवार को सतीश कौशिक और हास्य अभिनेत्री भारती अचरेकर शहर के मेहमान बने। सतीश कौशिक ने बताया कि मैं पहले भी मेरठ आ चुका हूं।

यहां के लोगों का मुंबई में बोलबाला है, ये तो कलाकारों की धरती है। अपने अभिनय के बारे में उन्होंने बताया कि बचपन से ही मैं रिजेक्ट होता रहा हूं। फिल्मों में आडिशन देने जाता तो रिजेक्ट हो जाता। 11वीं कक्षा में पहली बार स्कूल में कविता पर अभिनय किया, जिसे सुनकर छात्र बहुत खुश हुए। बस सोच लिया था कि अभिनय की लाइन में जाऊंगा, लेकिन इतना रिजेक्ट हुआ कि अभिनेता से पहले निर्माता बना। फिल्म पड़ोसन में मैंने महमूद के किरदार को खूब देखा, वो मुझे इतना पसंद था कि मेरा ड्रीम रोल बन गया। फिल्म साजन चले ससुराल में वो किरदार निभाया तो मन को तसल्ली हुई।
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उन्होंने बताया कि भारतीय सिनेमा का दायरा 100 साल में बहुत बढ़ गया है। तकनीकी के तौर पर सिनेमा मजबूत हुआ। आज से 70 साल पहले सिनेमा में केवल गिना-चुना रोजगार होता था हीरो, विलेन, अभिनेता, गायक, बाजा बजाने वाला निर्देशक। लेकिन आज युवाओं को सिनेमा ने ढेर सारे रोजगार के विकल्प दिए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल में फिल्म सिटी बनाने का जो निर्णय लिया, सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए रिबेट शुरू की है वो हिंदी सिनेमा के प्रमोशन में अच्छा कदम है। मुंबई में लोग पहले एनएसडी को जानते भी नहीं थे। अनुपम खेर एनएसडी में मेरे क्लास फेलो रहे हैं। जब हम काम मांगने गए तो हमें धक्का देकर बाहर निकाला गया, लेकिन आज ओमपुरी, नवाजुद्दीन सिद्दकी, मनोज वाजपेई ऐसे नाम हैं जिन्हें एनएसडी की शिक्षा ने सितारा बना दिया।

रिश्तों में मसाला तलाशते हैं दर्शक : भारती आचरेकर
दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक ये जो है जिंदगी में खासी भूमिका निभाकर दर्जनों फिल्मों और सीरियलों में काम कर चुकी भारती आचरेकर कहती हैं भारतीय दर्शक पारिवारिक रिश्तों में मसाला देखना पसंद करते हैं। उन्हें रोमांटिक के बजाय सास-बहू की लड़ाई, सौतनों की लड़ाई पसंद है। छोटा पर्दा दर्शकों की यह मांग पूरी करता है।

रंगमंच के कलाकार छोटे पर्दे पर इसलिए चल जाते हैं क्योंकि वहां बहुत कुछ वास्तविक होता है। फिल्मों में छोटे कलाकार के लिए कोई मजबूत किरदार होना चाहिए। मैंने शास्त्रीय संगीत सीखा लेकिन अभिनय मेरी पसंद शुरू से रहा। पहले रंगकर्म किया अब फिल्में करती हूं। रंगकर्म से हमेशा जुड़ी रहूंगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनका सीरियल ‘सुमित संभाल लेगा’ आने वाला है। इसमें उनके किरदार का नाम डॉली है।
 
एफटीआईआई को राजनीति से रखें दूर
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के लगातार विवादों में रहने क ा प्रमुख कारण सतीश कौशिक ने राजनीति को बताया। एफटीआईआई में डायरेक्टर और छात्रों के  अनुशासन के नाम पर जो नित नए विवाद सामने आ रहे हैं वो राजनीति है। उन्होंने कहा कि कला के मंदिर में राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोई योग्य व्यक्ति एफटीआईआई का चेयरमैन बने, चाहे वह किसी भी दल का हो।
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