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मंगलसूत्र, बटन, शाल और लेडीज पर्स में लगे थे कैमरे

Sat, 09 Jan 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पहली बार शायद किसी चुनाव में तीसरी आंख से वोटों की ऑनलाइन निगरानी की गयी हो। अब तक पुलिस-प्रशासन सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी करते रहे हैं, लेकिन खुफिया कैमरे से किसी प्रत्याशी ने अपनी वोटों की निगरानी शायद ही पहली बार करायी हो।
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एक पार्टी प्रत्याशी ने अपनी तमाम वोटों की निगरानी अत्याधुनिक ऑनलाइन खुफिया कैमरों से करायी। डीएम ने भी तलाशी में इन खुफिया कैमरों के पकड़ में आने की बात स्वीकार की। लेकिन अब इन कैमरों का क्या हुआ और उन सदस्यों पर क्यों कार्रवाई नहीं हुई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में एक-एक वोट के लिए जमकर खरीद-फरोख्त हुई। दोनों प्रत्याशियों की तरफ से मुंहमांगी कीमत जिला पंचायत सदस्यों को दी गयी। जिसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये तक बतायी जा रही है। सपा जहां अपने पक्ष में 22 वोट का दावा करती रही तो भाजपा 23 वोट होने का दावा करती रही।  ऐसे में दोनों ही गुट क्रॉस वोटिंग होना तय मान रहे थे। ऐसे में एक प्रत्याशी ने अपने पक्ष में जुटाई गई वोटों को सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक विधि निकाली।
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इसके लिए दिल्ली की एक नामचीन कंपनी को हायर किया गया।

यह कंपनी जासूसी का काम करती है। इस कंपनी के लोगों ने बृहस्पतिवार सुबह इस प्रत्याशी के समर्थन में जुटायी गयी वोटों को कैमरों से लैस किया। महिलाओं के लिए शॉल, मंगलसूत्र और पर्स में कैमरे सेट किए गए। जबकि पुरुषों को उनकी नेहरू जैकेट, कोट और शर्ट के बटन आदि के साथ कार की चाबी के छल्लों में कैमरे फिट किए गए।

दूर बैठकर ऑन लाइन देखा नजारा
इन कैमरों की खासियत ये रही कि जिला पंचायत सदस्य के पास मौजूद कैमरे के माध्यम से बाद में वोट की फोटो नहीं बल्कि उसको लाइव देखा गया। कंपनी के लोगों ने करीब आधा किमी दूर मौजूद अपनी गाड़ी में बैठकर एक-एक वोट की स्थिति को देखा और उसकी रिकॉर्डिंग की।

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
निर्वाचन आयोग के सख्त आदेश थे कि मतदान में पूरी गोपनीयता रखी जाएगी। बावजूद इसके एक गुट ने इसे भंग किया। तलाशी के दौरान पांच कैमरे पकड़े जाने की बात खुद जिलाधिकारी पंकज यादव ने स्वीकार की, लेकिन अब कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि उन पांच कैमरों का क्या हुआ। वहीं, जिन सदस्यों ने गोपनीयता भंग करने का प्रयास किया, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गयी। यह सारे सवाल प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।

सदस्यों को छूटते रहे पसीने
मतदान के दौरान सभी सदस्य जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर बरामदे में सोफों पर बैठाए गए। इसके बाद एक-एक को जिलाधिकारी कार्यालय में बुलाया गया। जहां पर पुरूषों और महिलाओं की अलग-अलग तलाशी की व्यवस्था थी। ऐसे में जब तलाशी की बात पता चली तो कई सदस्य, खासतौर पर महिलाओं को पसीने छूट गए।
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